भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : आईपीसी यह निर्धारित करता है कि कौन सा कृत्य अपराध है और उसके लिए सजा क्या है। जो की अब 1 जुलाई से IPC के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता लागू हो जाएगा। कई नई धाराएं जोड़ी गई हैं और कई जुर्माने बढ़ाए गए हैं| अंततः महिलाओं के लिए नए बीएनएस नियम क्या हैं? आइये जानिए|
दरअसल, 1 जुलाई 2024 से दस दिन बाद देश में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो जाएंगे. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के मुताबिक बदलते समय को ध्यान में रखते हुए सुधार होना चाहिए| लोगों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा था| सिस्टम में दिक्कतें थीं, इसलिए बदलाव किए जा रहे हैं।
मिडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नए कानून के लागू होने के बाद आईपीसी 1860 को भारतीय न्याय संहिता कहा जाएगा, इसके बाद इंडियन एविडेंस एक्ट अधिनियम 1872 को भारतीय साक्ष्य संहिता और सीआरपीसी 1898 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कहा जाएगा।
इन तीनों के न सिर्फ नाम बदल जाएंगे बल्कि इनके बारे में भी बहुत कुछ बदल जाएगा। कौन सा कार्य अपराध है और उसकी सजा क्या है? इसका निर्णय आईपीसी द्वारा किया जाता है, लेकिन अब इसे भारतीय न्यायिक संहिता कहा जायेगा| आईपीसी में 511 धाराएं थीं, अब भारतीय न्यायिक संहिता में 356 धाराएं होंगी.
आईपीसी की धारा 376 के मुताबिक, रेप के दोषी होने पर 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है। बीएनएस के अनुच्छेद 64 में भी यही सजा दी गई है।
बीएनएस में नाबालिगों से बलात्कार पर कड़ी सजा दी गयी है। 16 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार के लिए कम से कम 20 साल की जेल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है। यदि आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई तो व्यक्ति अपना पूरा जीवन जेल में बिताएगा।
बीएनएस के धारा 65 में ही यह प्रावधान है कि 12 साल से कम उम्र की लड़की से बलात्कार का दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सज़ा हो सकती है। यहां भी, आजीवन कारावास तब तक लागू रहता है जब तक अपराधी जीवित रहता है। साथ ही ऐसे मामलों में मौत की सज़ा का भी प्रावधान है| इसके अलावा जुर्माना भी है|
एक नई धारा 69 भारतीय न्याय संहिता में जोड़ा गया है। इस फैसले के अनुसार, जो कोई भी शादी, रोजगार, पदोन्नति आदि का झूठा वादा करके किसी महिला के साथ गलत संबंध बनाता है तो उसे जुर्माने के साथ साथ 10 साल की सजा हो सकती है| कानून में प्रावधान है कि जो व्यक्ति अपनी पहचान छिपाकर शादी करेगा, उसे 10 साल की जेल की सजा होगी।
दहेज के लिए मौत की सज़ा में कोई बदलाव नहीं है|IPC की धारा 304 (बी) और BNS की धारा 80 दहेज द्वारा मृत्यु की परिभाषा और उसकी सजा का प्रावधान दिया है। यदि किसी महिला की शादी के सात साल के भीतर जलने, चोट लगने या संदेह के कारण मृत्यु हो जाती है|
और यह ज्ञात होता है कि उसके जीवनकाल के दौरान उसके पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा उसे प्रताड़ित किया गया था, तो मृत्यु को दहेज हत्या माना जाता है। दहेज प्रताड़ना के मामले में न्यूनतम सजा सात साल है, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।
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