छत्तीसगढ़ में नीट प्रदर्शन विवाद: सोशल मीडिया रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस, अश्लीलता फैलाने वालों पर होगी FIR
नीट-2026 पेपर लीक के विरोध में 36 दिन चले आंदोलन के बाद अब छत्तीसगढ़ में नया विवाद खड़ा हो गया है। रायपुर समेत प्रदेश के सभी 33 जिलों में जेन-जी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शनों के दौरान लहराए गए कुछ आपत्तिजनक पोस्टरों और सोशल मीडिया पर वायरल फोटो-वीडियो को लेकर पुलिस में शिकायतें पहुंची हैं। पुलिस ने इसके आधार पर संबंधित लोगों की पहचान शुरू कर दी है।
नाबालिगों को थमाए गए आपत्तिजनक बैनर
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजधानी रायपुर में कलेक्टोरेट चौक स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर प्रतिमा के पास हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। इनमें कुछ नाबालिग भी थे। आरोप है कि उनके हाथों में भी अशोभनीय और अपशब्द लिखे पोस्टर थमाए गए थे। इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने की भी चर्चा है, और इसकी पुष्टि होने पर बीएनएस की धारा 223 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद बीच सड़क पर जश्न भी मनाया गया था। अब पुलिस उन लोगों की जांच कर रही है जिन्होंने न सिर्फ पोस्टर लहराए, बल्कि उन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड और प्रसारित भी किया। प्रदेश के सभी जिलों की पुलिस को सोशल मीडिया की कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, और जांच के बाद एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जानकारों की राय: विरोध का अधिकार, लेकिन मर्यादा जरूरी
- मनोचिकित्सक डॉ. दुबे के मुताबिक, सोशल मीडिया पर तुरंत ध्यान खींचने और अलग पहचान बनाने की चाह में कुछ युवा चौंकाने वाली भाषा का इस्तेमाल करते हैं। समूह का प्रभाव भी उन्हें ऐसे कदम उठाने के लिए प्रेरित करता है।
- समाजशास्त्री डॉ. फलेंद्र कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन अश्लीलता और अभद्रता का नहीं। कुछ लोगों के आपत्तिजनक व्यवहार को पूरे आंदोलन का स्वरूप भी नहीं माना जाना चाहिए।
कानूनी और साइबर पहलू: किन धाराओं के तहत होगी कार्रवाई?
- अधिवक्ता विपिन अग्रवाल के अनुसार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सार्वजनिक स्थान पर अश्लील पोस्टर लगाना या प्रदर्शित करना अपराध है। ऐसे मामलों में बीएनएस की धारा 294 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
- पोस्टर में महिला का अशोभनीय चित्रण होने पर स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम भी लागू हो सकता है। सार्वजनिक शांति भंग होने या लोगों में क्षोभ फैलने की स्थिति में बीएनएस की धारा 296 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
- साइबर क्राइम एक्सपर्ट मुकेश चौधरी ने बताया कि आपत्तिजनक सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों पर बीएनएस के साथ आईटी एक्ट की धाराएं 67 और 67ए लग सकती हैं। महिला अथवा नाबालिग से जुड़ी सामग्री होने पर धारा 67बी भी जुड़ सकती है। साइबर सेल आईपी एड्रेस (IP Address) और सोशल मीडिया रिकॉर्ड के जरिए मूल अपलोडर और इसे आगे शेयर करने वालों तक आसानी से पहुंच सकती है।

