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दुर्ग शिवनाथ नदी में जन्मदिन मनाने पहुंचे आठ दोस्तों में दो बच्चे बह गए, एक का शव मिला..मुक्तिधाम में खून के निशान और तंत्र-मंत्र की आशंका से मची सनसनी..

दुर्ग। जिले में शनिवार को दो अलग-अलग घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा। एक ओर शिवनाथ नदी में जन्मदिन मनाने पहुंचे दो बच्चे तेज बहाव में बह गए, जबकि दूसरी ओर कचांदुर गांव के मुक्तिधाम में खून के निशान और पूजा सामग्री मिलने से गांव में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

दुर्ग जिले के शिवनाथ नदी में दो बच्चों के बहने और कचांदुर मुक्तिधाम में खून के निशान व पूजा सामग्री मिलने से जुड़ी स्थानीय खबर।

जन्मदिन मनाने पहुंचे आठ दोस्तों में शिवनाथ नदी में दो बच्चे बह गए, एक का शव मिला

पुलगांव थाना क्षेत्र के छातागढ़ स्थित पीपरछेड़ी-गनियारी शिवनाथ नदी में जन्मदिन मनाने पहुंचे आठ दोस्तों में से दो बच्चे तेज बहाव की चपेट में आ गए। शनिवार (25 जुलाई) सुबह SDRF की टीम ने सर्च अभियान के दौरान एक बच्चे का शव बरामद कर लिया, जबकि दूसरे बच्चे की तलाश अभी भी जारी है।

जानकारी के अनुसार, उरला निवासी आठ दोस्त शुक्रवार दोपहर जन्मदिन मनाने नदी किनारे पहुंचे थे। बर्थडे सेलिब्रेशन के बाद शाम करीब 4 बजे 14 वर्षीय रेहान खान और 12 वर्षीय आरव नदी में नहाने उतरे। इसी दौरान दोनों गहरे पानी और तेज बहाव में बह गए।

किनारे मौजूद एक साथी ने दोनों को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के कारण वह सफल नहीं हो सका। इसके बाद बच्चों ने काफी देर तक अपने स्तर पर तलाश की और फिर परिजनों तथा पुलिस को सूचना दी गई।

सुबह शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

रात होने की वजह से SDRF की टीम रेस्क्यू शुरू नहीं कर सकी। शनिवार सुबह छह बजे से विशेष सर्च अभियान चलाया गया। करीब दो घंटे बाद घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर 14 वर्षीय रेहान खान का शव बरामद कर पुलिस को सौंप दिया गया। दूसरे बच्चे आरव की तलाश जारी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इसी स्थान पर 19 अप्रैल को भी दो युवकों की डूबने से मौत हुई थी। लगातार हो रही घटनाओं के बाद लोगों ने नदी के खतरनाक हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था, चेतावनी बोर्ड और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

मुक्तिधाम में खून के निशान और पूजा सामग्री मिलने से फैली चर्चा

दुर्ग जिले के कचांदुर गांव के मुक्तिधाम में शनिवार सुबह खून के निशान, नींबू, मछली, अंडे और अन्य पूजा सामग्री मिलने से ग्रामीण हैरान रह गए। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। गांव के सरपंच का दावा है कि वहां सूअर के बच्चे की बलि दी गई है, हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

सरपंच के मुताबिक, सुबह मुक्तिधाम में रेलिंग लगाने पहुंचे दो मजदूरों ने वहां बिखरी पूजा सामग्री और खून के निशान देखकर उन्हें जानकारी दी। इसके बाद पुलिस चौकी को सूचना दी गई।

ग्रामीणों का अनुमान है कि रात के समय किसी ने मुक्तिधाम में तंत्र-मंत्र से जुड़ी पूजा की होगी। सुबह लोगों ने जमीन पर खून के निशान और पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री देखी, जिसके बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

बैगा द्वारा पूजा किए जाने की आशंका

स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी बैगा ने तंत्र-मंत्र से जुड़ी पूजा की होगी और पूजा पूरी होने के बाद वहां से चला गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह पूजा किस उद्देश्य से की गई थी। घटना के बाद ग्रामीणों में डर और उत्सुकता दोनों का माहौल बना हुआ है।

पुलिस ने पशु बलि की पुष्टि नहीं की

पुलिस के अनुसार, मुक्तिधाम के आसपास खून के निशान जरूर मिले हैं, लेकिन यह खून किसका है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। जांच के दौरान पशु बलि जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।

वहीं सरपंच का दावा है कि सूअर के बच्चे की बलि देकर उसे मटके में रखा गया था। फिलहाल मौके पर मिले सामान के आधार पर केवल तंत्र-मंत्र से जुड़ी पूजा किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस कर रही जांच

सूचना मिलने के बाद जेवरा-सिरसा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और फिलहाल किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पूरे दिन गांव में इस घटना को लेकर चर्चाएं होती रहीं।

सावन से पहले 'गांव बांधने' की परंपरा

सरपंच ने बताया कि सावन शुरू होने से एक दिन पहले गांव में बैगा द्वारा 'गांव बांधने' की पूजा करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। वहीं कुछ ग्रामीणों का कहना है कि सावन के दौरान तंत्र-मंत्र से जुड़ी गतिविधियों की चर्चाएं भी बढ़ जाती हैं।

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