रायपुर/कुलगाम। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले से छत्तीसगढ़ के लिए बेहद दुखद खबर सामने आई है। कुलगाम में काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की जान चली गई। शुरुआती जांच के अनुसार, हमलावरों ने पहले दोनों की पहचान और नाम पूछे, फिर उन्हें निशाना बनाया। घटना के बाद दोनों परिवारों में मातम पसरा हुआ है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
अधिकारियों के अनुसार यह घटना कुलगाम से करीब 20 किलोमीटर दूर केलाम इलाके में हुई। मृतकों की पहचान सक्ती जिले के बुंदेली गांव निवासी 24 वर्षीय दीपक रात्रे और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव निवासी 28 वर्षीय भूपेंद्र भैना के रूप में हुई है। घटना के बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
दीपक रात्रे अपनी मां, दिव्यांग भाई, पत्नी और 2 वर्षीय बेटे का इकलौता सहारा थे। वहीं भूपेंद्र भैना अपने पीछे 2 साल का बेटा, बहन और दादी को छोड़ गए हैं। दोनों गांवों में घटना के बाद शोक का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, दोनों मजदूरों का अंतिम संस्कार कश्मीर में ही कर दिया गया। हालांकि भूपेंद्र के पिता दशरथ भैना ने पार्थिव शरीर को गृहग्राम लाने की मांग की थी। उनका कहना है कि उन्हें अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी भी नहीं थी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
भूपेंद्र तीन महीने पहले काम की तलाश में गए थे
छुईहा गांव के सरपंच धनीराम बंजारे के अनुसार, भूपेंद्र भैना अपनी पत्नी कचरा बाई के साथ करीब तीन महीने पहले रोजगार की तलाश में कश्मीर गए थे। घर पर उनका दो साल का बेटा, बहन और दादी रहते हैं। घटना के बाद गांव में शोक की लहर है। भूपेंद्र की बहन ने भी पार्थिव शरीर गांव लाने की मांग की थी।
पिता बोले- अंतिम संस्कार की जानकारी नहीं मिली
भूपेंद्र के पिता दशरथ भैना ने बताया कि उन्हें बेटे के अंतिम संस्कार की जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि पहले बताया गया था कि कर्फ्यू के कारण पार्थिव शरीर घर नहीं लाया जा सकेगा, बाद में पता चला कि अंतिम संस्कार हो चुका है।
परिवार की जिम्मेदारी दीपक के कंधों पर थी
सक्ती जिले के बुंदेली गांव निवासी दीपक रात्रे करीब एक साल पहले पत्नी और भाई के साथ मजदूरी करने जम्मू-कश्मीर गए थे। तीनों ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे थे। दीपक की जा-न जाने की खबर मिलते ही गांव में मातम छा गया।
ग्रामीणों के अनुसार परिवार की पूरी जिम्मेदारी दीपक पर थी। उनके नाना दिलहरण सांडे और मामा शंकरलाल सांडे ने छत्तीसगढ़ और जम्मू-कश्मीर सरकार से परिवार को उचित मुआवजा और आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
विधायक और प्रशासन ने परिजनों को बंधाया ढांढस
बिलाईगढ़ विधायक कविता प्राण लहरे ने वीडियो कॉल के माध्यम से मृतक की बहन से बात कर सांत्वना दी और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
वहीं बिलाईगढ़ एसडीएम प्रफुल्ल रजक, एसडीओपी विजय कुमार ठाकुर सहित प्रशासनिक अधिकारियों की टीम भूपेंद्र के घर पहुंची। अधिकारियों ने परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और हरसंभव प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन दिया।
ऐसे हुई पूरी घटना
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि हमलावरों ने पहले प्रवासी मजदूरों के नाम पूछे। इसके बाद दो हिंदू मजदूरों को समूह से अलग कर नजदीक से गोली मा-री। उस समय वहां कई प्रवासी मजदूर मौजूद थे, लेकिन हिंदू केवल यही दोनों थे।
घटना के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। वाहनों की जांच की जा रही है और संदिग्धों की तलाश में सर्च ऑपरेशन जारी है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, ईंट-भट्ठे पर यह घटना रात करीब 8:30 बजे हुई। इस दौरान 3 से 4 राउंड फायरिंग की आवाजें सुनी गईं। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि हमलावरों ने पहले रेकी कर इलाके का चयन किया था।
अगस्त से नवंबर तक कश्मीर में सेब की तुड़ाई का मौसम रहता है। ऐसे में श्रमिकों पर हुई इस घटना से आने वाले दिनों में बागवानों की परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों को इस घटना में एक स्थानीय और एक विदेशी आ*तंकी के शामिल होने का संदेह है। शुरुआती जांच का फोकस मोहम्मद लतीफ पर है। बताया गया है कि वह पिछले वर्ष लश्कर-ए-तैयबा/द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) से जुड़ा था। मामले की जांच जारी है और अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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उसे वही पुरानी घुटन महसूस हुई—एक छोटा सा कमरा,

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