Bhilai ki Patrika news, कोविड के कारण करीब 2 साल से शिक्षा व्यवस्था चरमरा रही है। नतीजतन, शिक्षा ऋण बाजार ठंडा रहा। लेकिन अब कोरोना का असर कम होता जा रहा है. कॉलेज और विश्वविद्यालय खुलने लगे हैं। इस बीच दाखिले का दौर शुरू हो गया है। प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों और इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। समस्या यह है कि हर साल शिक्षा महंगी होती जा रही है।
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के अनुसार, अब तक एक प्रमुख निजी बिजनेस स्कूल से एमबीए करने पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च हुए हैं। पांच साल पहले इसकी कीमत 10-12 लाख रुपये थी। ऐसे में कई परिवारों को एजुकेशन लोन की जरूरत पड़ेगी। हालांकि, इस लोन की मदद से ग्रेजुएशन के बाद अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी न मिलने और कई सालों तक कर्ज में रहने का खतरा रहता है।
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के अनुसार, अब तक एक प्रमुख निजी बिजनेस स्कूल से एमबीए करने पर लगभग 20 लाख रुपये खर्च हुए हैं। पांच साल पहले इसकी कीमत 10-12 लाख रुपये थी। ऐसे में कई परिवारों को एजुकेशन लोन की जरूरत पड़ेगी। हालांकि, इस लोन की मदद से ग्रेजुएशन के बाद अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी न मिलने और कई सालों तक कर्ज में रहने का खतरा रहता है। यदि स्मार्ट तरीके से लोन पेमेंट की प्लानिंग पहले ही कर ली जाए तो इस परेशानी से बचा जा सकता है।
आइए जानते है पैसाबाजार डॉट कॉम के सीनियर डायरेक्टर साहिल अरोड़ा से...
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के अनुसार, अब तक एक बड़े निजी बिजनेस स्कूल से एमबीए करने पर लगभग 20 लाख रूपये की राशि लग जाती हैं। पांच साल पहले इसकी कीमत 10-12 लाख रुपये थी। ऐसे में कई छात्रों को एजुकेशन लोन की जरूरत पड़ेगी। हालांकि, इस लोन की मदद से ग्रेजुएशन के बाद अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी न मिलने और कई सालों तक कर्ज में रहने का जोखिम हो सकता है।
एजुकेशन लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
1. लोन की राशि
लोन राशि इतनी होनी कि कोर्स फीस के अलावा पढ़ाई के अलावा अन्य खर्चें भी वहन हो जाएं। हॉस्टल फीस, लैपटॉप और किताबों पर खर्च इसमें शामिल है। देश-विदेश में पढ़ाई के लिए अधिकतम लोन राशि क्रमशः 10 लाख और 20 लाख रुपए है। हालांकि, आईआईएम, आईआईटी और आईएसबी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई के लिए कुछ बैंक या गैर-बैंकिंग कंपनियां (NBFC) इससे ज्यादा लोन भी मंजूर कर सकती हैं।
भुगतान की अवधि
जब तक कोर्स पूरा नहीं होता तब तक एजुकेशन लोन पटाने की जरूरत नहीं पड़ती हैं । पढ़ाई पूरी होने के बाद भी बैंक/एनबीएफसी 1 से 2 साल तक का मोरटोरियम अवधि देती हैं। लेकिन लोन मिलते ही ब्याज लगना शुरू हो जाता है। किस्तें शुरू होने के बाद 15 वर्षों में लोन चुकाना होता है।
3. ब्याज दर
सामान्य तौर पर बैंक/NBFC 4 लाख रुपए तक के एजुकेशन लोन लेने के लिये कोलैटरल या गारंटर की मांग नहीं करते हैं। कुछ बैंक 7.5 लाख तक का लोन भी बिना कोलैटरल के दे देते हैं। हालांकि, यदि बैंक/NBFC सह-आवेदक की भुगतान क्षमता से संतुष्ट हैं तो तीसरे पक्ष की गारंटी की जरूरत नहीं होगी । 7.5 लाख से ज्यादा लोन के लिए प्रॉपर्टी, एफडी, म्यूचुअल फंड, आदि के रूप में बैंक अतिरिक्त सिक्युरिटी की मांग कर सकता है।
मार्जिन मनी
4 लाख रुपए तक के एजुकेशन लोन के लिए मार्जिन मनी की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इससे ज्यादा रुपयों का लोन लेने के लिए भारतीय और विदेशी कोर्स के खर्च का क्रमश: 5% और 15% का इंतजाम स्वयं करना होगा। हालांकि यदि आप आईआईटी जैसे किसी प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान में एडमिशन लेना चाहते हैं तो SBI जैसे कुछ बैंक मार्जिन मनी की शर्त नहीं रखते हैं।
साथ ही एजुकेशन लोन के इन पहलुओं पर भी गौर करे...
कॉलेज-बैंक पार्टनरशिप
कई संस्थान बैंक/NBFC के साथ पार्टनरशिप कर लेते हैं। इसलिए छात्र पता लगा सकते हैं कि वो जिस यूनिवर्सिटी/कॉलेज में एडमिशन लेना चाहते है ।
2)अनुमान लगाएं कमाई
पढ़ाई के बाद आपको कितनी सैलरी मिल सकती है, इसका अनुमान लगाएं। फिर लोन पेमेंट प्लान इस तरह तैयार करें कि उम्मीद से कम सैलरी मिलने या नौकरी जाने पर डिफॉल्ट का जोखिम ना हो। आप चाहें तो बिना कोई शुल्क दिए एजुकेशन लोन का पूर्व शुल्क भी दे सकते हैं।
3)टैक्स का लाभ
यदि आप अपने लिए, बच्चों, पति/पत्नी या अभिभावक के तौर पर किसी के लिए एजुकेशन लोन ले रहे हैं तो आयकर अधिनियम की धारा 80ई के तहत कर छूट ले सकते हैं। यह छूट लोन के ब्याज भुगतान करने पर मिलती है और इसकी कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है। हालांकि लोन की ईएमआई शुरू होने से 8 सालों तक ही आपको यह टैक्स छूट मिलेगी। इसलिए सही यही होगा कि 8 सालों में ही पूरा लोन चुका दें।
3)गारंटर
आम तौर पर बैंक/NBFC 4 लाख रुपए तक के शिक्षा लोन के लिए कोलैटरल या गारंटर की डिमांड नहीं करते हैं। कुछ बैंक 7.5 लाख तक का लोन भी बिना कोलैटरल के दे देते हैं। हालांकि, यदि बैंक/NBFC सह-आवेदक की भुगतान क्षमता से संतुष्ट हैं तो तीसरे पक्ष की गारंटी की जरूरत नहीं पड़ेगी। 7.5 लाख से ज्यादा लोन के लिए प्रॉपर्टी, एफडी, म्यूचुअल फंड, आदि के रूप में बैंक अतिरिक्त सिक्युरिटी मांग सकता है।

