भिलाई की पत्रिका, सरकार ने भिलाई नगर निगम पर अपनी ही संपत्ति बेचने के लिए अजीब शर्त रखी थी। कहा गया कि जमीन की बिक्री से प्राप्त राशि का आधा हिस्सा सरकारी खजाने में जमा कराने की शर्त पर ही प्रदान की जायेगी।
इसके खिलाफ पार्षद भोजराज सिन्हा की याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भिलाई नगर निगम को संपत्ति बेचने के बाद प्राप्त राशि को खर्च नहीं करने के आदेशों पर रोक लगा दी है।
भिलाई नगर निगम पार्षद भोजराज सिन्हा ने अपने वकील के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया है कि भिलाई नगर निगम ने नगरीय प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर 1250 भूखंडों को बेचने की अनुमति मांगी थी।
राज्य सरकार ने कलेक्टर को भूखंडों की बिक्री का आदेश अधिकृत किया था। इसके साथ ही राज्य सरकार ने एक शर्त रखी है कि प्लॉट की बिक्री से मिलने वाली राशि को दो हिस्सों में बांटा जाएगा. एक हिस्सा राज्य सरकार के खजाने में जमा होगा और एक हिस्सा निगम के पास रहेगा।
याचिकाकर्ता के साथ नगर निगम के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि नगर निगम के अपने नियम-कानून होते हैं। उस प्रावधान के तहत, वह अपनी संपत्ति को लीज पर या बेच सकता है।
दोनों ही मामलों में प्राप्त राशि पर पूरा अधिकार नगर निगम के पास होगा। यह राशि निगम के खजाने में जमा की जाएगी और इसका उपयोग नगर निगम द्वारा किया जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद सरकार की ओर से दी गई सशर्त अनुमति को खारिज कर दिया है.
कोर्ट ने कहा है कि संपत्ति बेचने के बाद यह राशि निगम के खजाने में जमा करा दी जाएगी. फिलहाल यह राशि कहीं भी खर्च नहीं की जाएगी।
23 प्लाटो की बिक्री से मिले 5 करोड़ 50 लाख रुपये
भिलाई नगर निगम ने फिलहाल 23 प्लॉट बेचे हैं। इससे 5 करोड़ 50 लाख रुपये की आमदनी हुई है।बड़ी रकम मिलने के बाद नगर निगम और राज्य सरकार के बीच विवाद शुरू हो गया।
भिलाई नगर निगम को अभी 1227 और प्लॉट बेचने हैं। अनुमानित कीमत 125 करोड़ रुपए है।

