खतरा: भिलाई 3 के नवनिर्मित गौरव मार्ग के दोनों तरफ भरा पानी, बढ़ सकता है डेंगू का खतरा।

 Bhilai ki Patrika news,भिलाई।शहर में बहुत जल्द ही  डेंगू का खतरा मंडराने की आशंका बनी हुई हैं। क्योंकि कुछ दिनों से बारिश नही  ही रही है जिससे कुछ दिन पहले हुये बारिश के पानी का जगह जगह ठहराव हो गया है।


यह गंदा पानी डेंगू के लार्वा को न्यौता दे रहा है। निगम का इस ओर ध्यान भी नही दे रही है। जबकि डेंगू के लार्वा साफ पानी में ही पनपते हैं। सभी जगहों से साफ बारिश का पानी रुका हुआ दिख रहा है।भिलाई 3 के नवनिर्मित गौरव मार्ग के दोनों ओर पानी भरने की स्थिति है.

आपको बता दें कि 2018 में भिलाई में फैले डेंगू के लार्वा ज्यादातर साफ पानी में पाए गए थे। तभी से आशंकिय  क्षेत्रों पर जले हुए तेल व टेमीफास का छिड़काव शुरू हो गया। भिलाई नगर निगम ने सबक तो सीखा है लेकिन कई छोटे संगठन अभी भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।चाहे वह जामुल नगर पालिका हो या भिलाई चरोदा नगर निगम। रिसाली व दुर्ग नगर निगम में पानी भरने वाले स्थानों पर टेमीफास का लगातार छिड़काव किया जा रहा है। इससे डेंगू के लार्वा पनपने का खतरा कम हो गया है।


उमस से बढ़ी बेचैनी, बढ़े चर्म रोग के मरीज


जुलाई की शुरुआत में भारी बारिश हुई। तब से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इसलिए तापमान बढ़ गया है। लोग गर्मी व उमस से बेहाल हैं। गर्मी के कारण चर्म रोग के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।

वैसे भी जुलाई से सितंबर का महीना वायरल फीवर और चर्म रोगों के बढ़ने का महीना है। वायरल फीवर के साथ-साथ सरकारी व निजी अस्पतालों में चर्म रोग के मरीज की संख्या मे इजाफा हो रहे हैं।


कहाँ पनप सकता है लार्वा


-घर के कूलर में या खाली किसी भी बर्तन या पात्र में


-छत पर रखे टायर, 


-आपके घर के आसपास जहां बारिश का पानी ठहर गया हो


-पानी की टंकी में,  ठहरे हुये पानी मे


स्वास्थ्य विभाग की टीम को तैनात कर दिया गया है। जहां जलजमाव दिखाई दे रहा है वहां छिड़काव किया जा रहा है।


साथ ही उमस के कारण लोगों को ज्यादा पसीना आता है। पसीने की वजह से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में काफी फंगस पैदा हो जाता है। खुजली जैसी बीमारी का कारण बनता है। इसकी शिकायतें सबसे ज्यादा जुलाई से सितंबर के बीच होती हैं।


इसलिए डॉक्टर इस मौसम में हल्के कपड़े पहनने की सलाह देते हैं। सुपेला अस्पताल के प्रबंधन के मुताबिक जहां सामान्य दिनों में त्वचा रोग के 20 से 25 मरीज ही आते थे, वहीं जुलाई के अंतिम सप्ताह में यह संख्या 70 से बढ़कर 80 हो गई है. अगस्त और सितंबर में बढ़ेगी संख्या।