BHILAI KI PATRIKA :इजराइल और हमास के बीच युद्ध जारी है. इस बीच हमास लड़ाकों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. बताया जाता है कि 7 अक्टूबर को इजराइल पर हमले के दौरान हमास के लड़ाके कैप्टागन नाम का सिंथेटिक ड्रग लेकर आए थे. बताया जा रहा है कि हमास के लड़ाकों ने ड्रग्स की भारी खुराक लेकर इस हमले को अंजाम दिया. रिपोर्टों में कहा गया है कि कई मारे गए लड़ाकों की जेबों में कैप्टागन की गोलियाँ पाई गईं। कैप्टागन को 'गरीबों की कोकीन' के नाम से भी जाना जाता है।
द जेरूसलम पोस्ट के मुताबिक, हमास के लड़ाकों ने कैप्टागॉन नामक गोलियों का इस्तेमाल कर हमला किया।
कैप्टागन एक प्रकार की सिंथेटिक दवा है। गोली ने न तो हमास के लड़ाकों को ज्यादा
देर तक भूखा रखा और साथ ही उन्हें सतर्क रखा। ऐसा माना जाता है कि इस दवा के
प्रभाव की वजह से लड़ाके निहत्थे लोगों को आसानी से मार दिए थे । आतंकी संगठन
आईएसआईएस पर अपने लड़कों को कैप्टागन गोलियां खिलाने का भी आरोप लगा है|
कैप्टागन एक सिंथेटिक
दवा है जिसे मूल रूप से 1961 में जर्मनी में विकसित किया गया था। इसे ध्यान आभाव
विकार जैसे मानसिक विकारों के इलाज के लिए बनाया गया था। हालाँकि, बाद में मध्य पूर्वी
युवाओं ने पार्टी ड्रग्स के रूप में कैप्टागन टैबलेट का उपयोग करना शुरू कर दिया।
कैप्टागन गोलियां 2015 में तब सुर्खियों में आईं जब यह पता चला कि इस्लामिक स्टेट
के आतंकवादी किसी भी आतंकवादी हमले को अंजाम देने से पहले अपने डर को शांत करने के
लिए गोलियों का इस्तेमाल करते थे।
पिछले दशक में सीरिया कैप्टागन का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश
बना है. इसी वजह से सीरिया को दुनिया का नार्को स्टेट भी कहा जाता है. ब्रिटिश
सरकार के मुताबिक दुनिया की 80 फीसदी कैप्टागन
सीरिया में बनती है.न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सीरिया में कैप्टागन
ड्रग्स बनाने की कंपनियां सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के रिश्तेदारों की है.
पिछले एक दशक में, सीरिया कैप्टागन का सबसे
बड़ा उत्पादक और निर्यातक बन गया है। इसी वजह से सीरिया को दुनिया का नार्को स्टेट
भी कहा जाता है। ब्रिटिश सरकार के अनुसार, दुनिया का 80 फीसदी कैप्टागन सीरिया
में बनाया जाता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सीरिया में कैप्टागन
दवाएं बनाने वाली कंपनियां सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद के रिश्तेदारों की
हैं। जो हमास का समर्थन करता है |

