भिलाई की पत्रिका न्यूज़ :पांच साल बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राज्य की जनता ने वोट देकर एक बार फिर सत्ताधारी दल के नेताओं के अहंकार को हिला दिया है. वैसे, बीजेपी पहले ही कह चुकी है, ''बदलबो-बदलबो ये दारी-बदल के रहिबो.'' उधर, कांग्रेस ने भी 75 साल पार का नारा बुलंद कर दिया है. साथ ही यह विश्वास भी था कि "भूपेश है तो भरोसा है।" लेकिन चुनाव नतीजे देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि दाऊजी के कारण ही कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा|
1) 5 साल के बाद छत्तीसगढ़ में बीजेपी सत्ता में आई। लेकिन सत्ता में वापसी के साथ ही कांग्रेस नेताओं ने सत्ता की बागडोर अपने हाथ में रखने की अपनी परंपरा का पालन किया। स्पष्ट बहुमत के बावजूद सीएम पद को लेकर तीन प्रमुख दिग्गज नेताओं के बीच तीखी तकरार छिड़ गई| मुख्य रूप से सीएम के तौर पर स्थिति भूपेश बघेल, टी.एस. के बीच थी. एक दिन खबर आई कि ताम्रध्वज साहू को सीएम पद के लिए नामांकित किया गया है. कुछ मीडिया ने इस खबर को प्रकाशित भी किया. लेकिन फिर पता चला कि भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव ढाई-ढाई साल तक प्रभारी रहेंगे, सबसे पहले भूपेश बघेल कार्यभार संभालेंगे।
2) ढाई साल बाद भूपेश बघेल और सिंहदेव के
बीच फिर तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई. सिंहदेव ने अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश
की, लेकिन अंत में
भूपेश बघेल ही मुख्यमंत्री बने रहे. इस दौरान भूपेश बघेल के कई ऐसे पहलू सामने आये
जो प्रदेश की जनता की उम्मीदों से बढ़कर थे। ऐसा नहीं है कि भूपेश बघेल का अहंकार
या दाऊगिरी पिछले पांच सालों में उनके बयानों से साफ दिखाई देती है | या आप कह सकते हैं कि भूपेश बघेल में
सत्ता का नशा सिर्फ पांच साल के अंदर ही
उभर आया. इस बीच, राज्य
की जनता ने पिछले 15
वर्षों से मिलनसार और शांत स्वभाव के रमन सिंह को अपना मुख्यमंत्री चुना है। आइए
अब जानें कि कांग्रेस की विफलता के मुख्य
कारण क्या हैं-
3) राष्ट्रीय
सत्ता संभालने के बाद, भूपेश
बघेल ने धरती पुत्र की छवि विकसित की, लेकिन अक्सर विपक्ष को संबोधित करते समय उन्होंने ऐसी गलत सलत
टिप्पणियाँ कीं कि उन्हें लगा कि वह विपक्ष के नेता की तरह है न की सीएम| सत्ता में आने के बाद भी पीसीसी चीफ
भूपेश बघेल का अंदाज गायब नहीं हुआ. वहीं 15 साल तक मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह हमेशा
नपे-तुले शब्दों में बात करते थे और कम शब्दों में अपनी बात रखते थे.|
4)
जहां कांग्रेस सरकार युवाओं के लिए नौकरियां और रोजगार पैदा करने का वादा करके
सत्ता में आई थी। लेकिन भूपेश बघेल युवाओं से किया अपना वादा पूरा नहीं कर सके.
रिक्तियों को भूल जाइए: पीएससी भर्ती में गंभीर अनियमितताएं भूपेश सरकार के दौरान
सामने आई थीं। पीएससी भर्ती: कांग्रेस नेताओं और सरकारी अफसरों के बेटे-बेटियों की
बेधड़क भर्ती, तो
कटघरे में थी भूपेश सरकार वहीं,
अगर मजदूर वर्ग की बात करें तो कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के
कुछ ही दिनों के भीतर असंतोष सामने आने लगा था. चाहे वह डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी की
वेतन वृद्धि की मांग हो या कांग्रेसी नेताओं का ख़राब रवैया, कर्मचारी असंतुष्ट महसूस करने लगे।
5) डिप्टी
सीएम टीएस सिंहदेव ने सत्ता संभालने के 10 दिन के भीतर अस्थायी और संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का वादा
किया था | अनियमित
कर्मचारी पांच साल तक विरोध करते रहे, लेकिन भूपेश सरकार अड़ी रही और कांग्रेस सरकार आने के बाद भी कर्मचारी अनियमित ही रहे।
7) भूपेश
सरकार पर ये आरोप लगा की प्रधानमंत्री
आवास योजना के तहत सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली हिस्सेदारी जारी नहीं किया | जिसके कारण कई लोग आवास योजना का लाभ
नहीं उठा पाएंगे। वहीं, चुनाव
से पहले जब जनता का गुस्सा फूटा तो भूपेश बघेल ने घोषणा पत्र में यह घर देने का
वादा किया, लेकिन
तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

