भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : कोटा शिक्षा का शहर है, लाखों बच्चों के सपनों का शहर है और हजारों अभिभावकों के लिए आशा का शहर है। यह एक ऐसा शहर है जहां हर साल हजारों बच्चे डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना लेकर आते हैं। यहां बच्चे शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा में अपने जीवन के सपनों को साकार करने का प्रयास करते हैं और उनके माता-पिता की उम्मीदें भी उनके परीक्षा परिणामों पर निर्भर करती हैं।
इंजीनियरिंग- डॉक्टर की इस प्रतियोगिता में हालांकि कई छात्र पास होने से खुश हैं, लेकिन कई छात्र ऐसे भी हैं जो लाख कोशिशों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाते हैं. चूँकि अपेक्षाएँ और प्रयास साथ-साथ चलते हैं, इसलिए कई बच्चे हिम्मत हार जाते हैं और मृत्यु को गले लगा लेते हैं।
मिडिया जानकारी के मुताबिक छात्र के आत्महत्या मामले में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए मामा-भांजा एक साल से तलवंडी स्थित पीजी में साथ रह रहे थे. मामा भरत (20) धौलपुर के डिंडोली का रहवासी था | उसके साथ उसका भांजा रोहित (17) भी रहता था।
रोहित आज सुबह 10:30 बजे सैलून जाने के लिए घर से निकला था. जब वह अपने कमरे में लौटता है तो उसे पता चलता है कि भरत अब इस दुनिया में नहीं है। उनकी अनुपस्थिति में भरत ने आत्महत्या कर ली। कमरे में फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली |एक सुसाइड नोट भी मिला, जिस पर लिखा था, ''सॉरी मम्मी पापा मुझसे नहीं हो पाएग|
कल्पना कीजिए कि जब उसने यह डरावना कदम उठाया तो उसे कैसा महसूस हुआ होगा। यह पाया गया कि पिछले कुछ दिनों में आत्महत्या की घटना में किसी के पेपर अच्छे नहीं गए या किसी का नंबर अच्छा नहीं आया| टूटती उम्म्मीद के सामने छात्र ने मौत को गले लगा लिया |पिछले 48 घंटे में 2 छात्रों ने खुदखुशी कर ली है |
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