दुर्ग: दुर्ग जिला अस्पताल डॉ. विनीता धुर्वे का अद्वितीय रिकॉर्ड: 100 जुड़वां बच्चों की डिलीवरी , महज ढाई साल में उन्होंने इस उपलब्धि हासिल किया...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल की डॉ. विनीता धुर्वे ने अपनी चिकित्सा यात्रा में एक अनोखा और प्रेरणादायक रिकॉर्ड बनाया है। महज ढाई साल में, उन्होंने 100 जुड़वां बच्चों की डिलीवरी कराकर एक नया मानदंड स्थापित किया है। यह कोई साधारण उपलब्धि नहीं है, बल्कि उनकी मेहनत, समर्पण और अद्वितीय कौशल का प्रमाण है। अब तक, डॉ. विनीता धुर्वे ने कुल मिलाकर 14,500 प्रसव कराए हैं, जिनमें से अधिकांश नॉर्मल डिलीवरी थीं, जबकि 6,480 प्रसव सीजेरियन ऑपरेशन से हुए।

दुर्ग जिला अस्पताल में जुड़वां बच्चों का शतक

शुक्रवार को, जब भिलाई के कैलाश नगर निवासी शेख फैयाज की पत्नी बुशरा परवीन ने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया, तो यह डॉ. विनीता की जुड़वां बच्चों की 100वीं डिलीवरी थी। इस खास मौके पर, दुर्ग जिला अस्पताल का पूरा स्टाफ गर्व और खुशी से झूम उठा। 

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चिकित्सा यात्रा और समर्पण

डॉ. विनीता धुर्वे की चिकित्सा यात्रा 2003 में रायपुर मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री प्राप्त करने के बाद शुरू हुई। इंटर्नशिप के बाद, उन्होंने दुर्ग जिले के विभिन्न स्थानों पर सेवाएं दीं और 2011 से दुर्ग जिला अस्पताल के मैटरनिटी वॉर्ड में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल डिलीवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इमरजेंसी सिजेरियन और नसबंदी ऑपरेशन में भी निपुण हैं।

स्टाफ का योगदान

डॉ. विनीता धुर्वे ने अपने इस अद्वितीय रिकॉर्ड का श्रेय अपने स्टाफ को भी दिया। उनका कहना है कि बिना स्टाफ के सहयोग के यह उपलब्धि संभव नहीं थी। जब भी जुड़वां बच्चों की डिलीवरी का केस आता, स्टाफ के सभी डॉक्टर उन्हें ही रेफर करते थे।

लक्ष्य की ओर निरंतर प्रयास

डॉ. विनीता ने बताया कि 2011 से मैटरनिटी वार्ड में डिलीवरी कराते हुए, उन्होंने 2022 से 2024 के बीच जुड़वां बच्चों की 100वीं डिलीवरी का रिकॉर्ड बनाया। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की। किसी भी समय, चाहे रात हो या दिन, किसी भी कार्यक्रम को छोड़कर वे अपने लक्ष्य को पूरा करने में जुट जाती थीं।

डॉ. विनीता धुर्वे का यह रिकॉर्ड उनके अद्वितीय कौशल, समर्पण और उनके टीम के साथियों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया मानदंड स्थापित किया है, बल्कि अन्य डॉक्टरों और मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं। उनका यह योगदान निस्संदेह छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर है।

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