भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : यूपी , कुशीनगर हनुमानगंज थाना क्षेत्र में गैंगरेप का शिकार बनी एक किशोरी ने आखिरकार 23 दिनों की लड़ाई के बाद दम तोड़ दिया। दरिंदों ने सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसे जहर खिला दिया था। यह शर्मनाक घटना 30 जून को हुई थी, जिसके बाद किशोरी को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
घटना के बाद भी पुलिस की लापरवाही साफ देखने को मिली। आरोपी दो हफ्ते तक खुलेआम घूमते रहे, जबकि पुलिस ने घटना के एक हफ्ते बाद पीड़िता की मां से तहरीर लेकर दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। गिरफ्तारी के नाम पर पुलिस की उदासीनता साफ झलकती रही।
पीड़िता ने अपने बयान में 4 लोगों के नाम लिए थे
किशोरी की मां ने दो आरोपियों के नाम तहरीर में लिखे थे, लेकिन जब बेटी को होश आया, तो उसने मजिस्ट्रेट के सामने चार लोगों के नाम लिए थे। बावजूद इसके, पुलिस ने केवल दो ही आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना था कि किशोरी की तबीयत ठीक होने के बाद अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा, लेकिन तब तक किशोरी जिंदगी की जंग हार गई।
पुलिस की लापरवाही पर सवाल
इस पूरे मामले में पुलिस की लापरवाही और निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। पीड़िता की मां का कहना है कि गैंगरेप और जहरीला पदार्थ खिलाने के मामले में पुलिस ने इलाज के दौरान किशोरी का बयान लिया था, लेकिन कार्रवाई में देरी की। मीडिया में खबर आने के बाद ही पुलिस हरकत में आई और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
सीओ का बयान
सीओ खडडा उमेश कुमार भट्ट ने बताया कि वे आवश्यक कार्य से हाइकोर्ट आए हैं और मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए हनुमानगंज पुलिस को निर्देश दे रहे हैं।
कुशीनगर की इस घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि महिलाओं की सुरक्षा के प्रति पुलिस और प्रशासन कितनी संवेदनशील है। पीड़िता की मौत ने न सिर्फ उसके परिवार, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। न्याय की इस लड़ाई में अब देखना यह है कि दोषियों को कब और कैसे सजा मिलती है।
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