बाढ़ में एल्युमीनियम के बर्तन में जिंदगी की जंग : बीमार बुजुर्ग महिला की बाढ़ के पानी के बीच अस्पताल ले जाने की जद्दोजहत , जिंदगी बचाने मौत से दो दो हाथ , विडियो देखे...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : विशाखापत्तनम के जमीगुडा गांव से आई एक मार्मिक और चौंकाने वाली घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है। भारी बारिश और बाढ़ से जूझते इस गांव में एक बीमार बुजुर्ग महिला को अस्पताल ले जाने के लिए असामान्य और खतरनाक तरीका अपनाना पड़ा। गाँव के हालात इतने खराब थे कि महिला को एक बड़े एल्युमीनियम के बर्तन में बैठाकर नदी पार करवाई गई।

बाढ़ की त्रासदी और जमीगुडा का संघर्ष

जमीगुडा, जो विशाखापत्तनम जिले के पेडा बयालू मंडल में स्थित है, पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश के चलते बाहरी दुनिया से कटा हुआ है। इस बाढ़ ने न केवल लोगों के आने-जाने में रुकावट डाली है, बल्कि उनकी जिंदगी को भी जोखिम में डाल दिया है। इस बीच, एक बीमार बुजुर्ग महिला की स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसे अस्पताल ले जाना जरूरी हो गया। परंतु गाँव की सड़कें बाढ़ के पानी में डूबी होने के कारण सामान्य साधनों से उसे अस्पताल पहुंचाना नामुमकिन था।

विडियो देखे - 

एल्युमीनियम के बर्तन में पार की नदी

मिडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस आपदा से निपटने के लिए गाँव के लोगों ने जो तरीका अपनाया, वह दिल दहला देने वाला था। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक व्यक्ति एल्युमीनियम का बड़ा बर्तन लेकर आता है। बुजुर्ग महिला को इस बर्तन में बैठाया जाता है, और फिर वह व्यक्ति बर्तन को नदी में डालकर उसे तैराते हुए दूसरी ओर पहुंचाता है। इस दृश्य ने लोगों के दिलों को झकझोर दिया और सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हुई।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल और गुस्सा

सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हुआ, और लोगों ने इस पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। एक यूजर ने लिखा, "यह घटना आजादी के 77 साल बाद भी हमारी सरकारों की नाकामी को दिखाती है। जहां एक ओर नई राजधानी के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।"

सरकार पर उठे सवाल

इस घटना ने आंध्र प्रदेश की मौजूदा सरकार पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों ने कहा कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की सरकार को इन ग्रामीण इलाकों के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। नई राजधानी के विकास के लिए भारी बजट आवंटित करने के बावजूद, आदिवासी क्षेत्रों की दयनीय स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है।

जमीगुडा गांव की यह घटना सिर्फ एक वीडियो नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की उन अनदेखी सच्चाइयों की ओर इशारा करती है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस घटना ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सचमुच हम विकास के उस स्तर पर हैं, जहां हम हर नागरिक को समान रूप से सुरक्षा और सुविधाएं मुहैया करा सकें? सरकार और समाज दोनों को मिलकर इन समस्याओं का समाधान करना होगा, ताकि ऐसी घटनाएं फिर कभी न हों।

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