भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : कटिहार, बिहार - आलमपुर गांव के निवासी टिंपा रॉय की कहानी एक विचित्र और दर्दनाक घटना को उजागर करती है। साथ अंधविश्वास और उचित चिकित्सा की कमी के कारण हुई त्रासदी को भी बयां करती है।
घटना का प्रारंभ
मंगलवार को महानंदा नदी के किनारे मेहनत मजदूरी करते समय, टिंपा रॉय को एक जहरीले सांप ने काट लिया। आमतौर पर ऐसी स्थिति में लोग घबराकर मदद मांगते हैं, लेकिन टिंपा ने कुछ असाधारण करने का फैसला किया। गुस्से में आकर उसने उस सांप को जिंदा पकड़ लिया और एक डब्बे में बंद कर लिया।
अस्पताल का सफर
टिंपा उस सांप के साथ सीधे आजमनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। जिंदा सांप को देखकर वहां के डॉक्टर और कर्मचारी दंग रह गए। जब टिंपा से पूछा गया कि उसने सांप को क्यों पकड़ा, तो उसने बताया कि यदि डॉक्टर पूछते कि कौन सा सांप था, तो वह जवाब नहीं दे पाता। इसलिए वह सांप को लेकर ही आ गया।
सही इलाज न मिलने की वजह से त्रासदी
प्राथमिक उपचार के बाद, डॉक्टरों ने उसे कटिहार सदर अस्पताल रेफर किया। लेकिन, टिंपा ने अस्पताल जाने की बजाय सांप के विष को निकालने के लिए वैद्य हकीम और ओझा गुणी का सहारा लिया जो वहां नीम के पत्ते से झाड़-फूंक किया गया, लेकिन उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। परिजन उसे पुनः आजमनगर स्वास्थ्य केंद्र ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे पहले ही कटिहार सदर अस्पताल रेफर किया था। समय पर ईलाज नहीं मिलना उसकी मौत का कारण बना |
यह घटना एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि सांप के काटने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना अत्यंत आवश्यक है। अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में पड़कर जीवन को जोखिम में डालना घातक हो सकता है
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