बड़ी खबर : भिलाई में NIA की छापेमारी, NGO संचालक कला दास डहरिया के घर पर कार्रवाई, नक्सली सम्पर्क को लेकर संदेह के आधार पर जांच , 4-5 गाड़ियों में भर कर आए टीम के द्वारा की जा रही है कार्यवाई...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : भिलाई में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति के सदस्य और रेला नामक जनवादी सांस्कृतिक संगठन (NGO) के संचालक कला दास डहरिया के घर पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने छापेमारी की है। जामुल लेबर कैम्प स्थित उनके घर के बाहर CISF और जामुल पुलिस की टीम तैनात है। 

फंडिंग को लेकर जांच

रेला NGO किसान, आदिवासी और मजदूरों के संगठनों के लिए काम करता है और इसे देश भर से फंडिंग मिलती है। छापेमारी के दौरान सुबह 5.30 बजे छत्तीसगढ़ से बाहर की 4-5 गाड़ियों में भर कर आए लोगों ने कार्रवाई की। इस दौरान आसपास के घरों से लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई।

 NIA की पुष्टि नहीं

हालांकि, NIA की तरफ से इस कार्रवाई की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। एक स्थानीय अधिवक्ता ने बताया कि एनआईए की टीम ने कला दास डहरिया से पूछताछ की है। फिलहाल, इस पूरे मामले में एनआईए की ओर से कोई ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है। 

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

मिडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटनास्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और CISF तथा स्थानीय पुलिस की टीमें तैनात हैं। इलाके में  स्थानीय लोगो के बीच अचानक हुए इस तरह के कार्यवाई से कोताहुल माहौल बना हुआ है|

इस छापेमारी ने भिलाई के लोगों के बीच हलचल मचा दी है और सभी की निगाहें अब NIA की ओर से आने वाली आधिकारिक जानकारी पर टिकी हैं। फंडिंग को लेकर उठाए गए सवालों का क्या परिणाम होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।हालाँकि NIA की टीम ने उनकी बेटी का ख़राब पड़ा हुआ लेपटॉप , पेनड्राइव और मोबाइल फोन को अपने साथ जांच के लिए ले गयी है|

मामले में कला दास डहरिया ने  NIA की कार्रवाई के बारे में महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। डहरिया ने बताया कि उन्हें नक्सली संपर्क के संदेह पर सवाल-जवाब के लिए बुलाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके जनगायक होने के नाते, कई लोगों के पास उनका मोबाइल नंबर है, और इसे नक्सलियों से सांठगांठ की शंका के रूप में देखना गलत है।

मजदूर-किसानों की आवाज़ दबाने का प्रयास:

डहरिया के मुताबिक उन्होंने हमेशा मजदूरों और किसानों की स्थिति के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने सरकार से सवाल किया था कि क्या वे औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर मजदूरों के जीवन को सही ढंग से देख सकते हैं। उनका मानना है कि इसी आवाज़ को दबाने के लिए उन पर कार्रवाई की जा रही है।

रेला सांस्कृतिक काम:

डहरिया ने कहा कि 'रेला' उनका सांस्कृतिक काम है, जो जनजागरण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि उन्हें 1 अगस्त को रांची बुलाया गया है, और वे इस स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।

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