भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने निवास पर राज्य का पहला पारंपरिक त्यौहार हरेली बड़े ही उत्साह के साथ मनाया। मुख्यमंत्री ने अपनी धर्मपत्नी कौशल्या साय और परिवार के साथ मिलकर न केवल तुलसी माता, नांगर, कृषि उपकरणों और गेड़ी की पूजा की, बल्कि प्रदेशवासियों की समृद्धि और किसानों की बेहतर फसल के लिए भी कामना की।
हरेली के इस मौके पर मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को सजीव रखते हुए राउत नाचा के कलाकारों के अनुरोध पर पारंपरिक वेशभूषा धारण की। उनके इस कदम से महोत्सव में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। अपने उद्बोधन में उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं दीं और कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है, और यह त्यौहार मुख्य रूप से किसानों का है।
मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर कृषि यांत्रिकीकरण सब मिशन योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्र भेंट किए। उन्होंने कहा, "हरेली हमारे किसानों का त्यौहार है, और उनकी मेहनत से ही छत्तीसगढ़ समृद्धि की ओर अग्रसर है।"
पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भगवान शिव और गौ माता की पूजा कर प्रदेश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ के 70 से 80% ग्रामीण जनसंख्या के लिए विशेष महत्व रखता है, और सरकार किसानों की भलाई के लिए निरंतर कार्यरत है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री के साथ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, बीजेपी अध्यक्ष किरण देव सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे। सभी ने मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य की बेहतरी के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
हरेली तिहार के इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों की महक भी छाई रही। ठेठरी, खुरमी, अनरसा, करी लड्डू जैसे स्वादिष्ट पकवानों का आनंद मेहमानों ने उठाया।
मुख्यमंत्री साय ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि हरेली तिहार के अवसर पर शिव जी की पूजा अर्चना की गई, और किसानों के कृषि यंत्रों की पूजा की गई। साथ ही 23 ट्रैक्टर किसानों को भेंट किए गए और एक हार्वेस्टर भी प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने आगामी भोरमदेव दर्शन की भी जानकारी दी, जहाँ वे सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करेंगे और कावड़ियों पर पुष्प वर्षा करेंगे।
इस प्रकार हरेली तिहार का यह समारोह न केवल किसानों के लिए एक विशेष अवसर था, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का भी प्रतीक बना।
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