लापरवाही की हद: बच्चे की स्कूल में कट कर गिर गयी उंगली , कटी उंगली को प्रबंधन ने कूड़े में फेंकवा दिया , 4 घंटे ढूंढने के बाद जब कटी उँगली को जोड़ने डॉक्टर के पास ले जाया गया तो उसने कर दिया मना , मासूम छात्र बना दिव्यांग...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : देवरिया, उत्तर प्रदेश से आई एक दर्दनाक घटना ने सबका ध्यान खींचा है, जहाँ एक स्कूल में संवेदनहीनता का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल एक मासूम की ज़िंदगी पर गहरा असर डाला है, बल्कि स्कूल प्रशासन की लापरवाही भी उजागर की है।

घटना का विवरण

घटना देवरिया के एक स्कूल की है, जहाँ कक्षा 6 में पढ़ने वाले छात्र वासु तिवारी की उंगली स्कूल भवन में लगी चैनल से कट गई। इस गंभीर दुर्घटना के बाद जो हुआ, वह और भी ज्यादा चौंकाने वाला है। वासु के परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने कटी हुई उंगली को सहेजने की बजाय कूड़े में फिंकवा दिया। 

कटी हुई उंगली को ढूंढने में चार घंटे का समय लग गया। इस देरी के कारण डॉक्टरों ने उंगली को फिर से जोड़ने से मना कर दिया, और नतीजतन, वासु तिवारी की उंगली हमेशा के लिए चली गई। परिजनों का कहना है कि इस लापरवाही के चलते उनका बेटा अब हमेशा के लिए दिव्यांग हो गया है।

परिजनों की पीड़ा

वासु के पिता, संजय तिवारी, इस घटना से बेहद दुखी और आक्रोशित हैं। उन्होंने जिला अधिकारी दिव्या मित्तल से इसकी शिकायत की है, और इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। संजय तिवारी का कहना है कि अगर स्कूल प्रशासन ने समय पर कदम उठाया होता, तो उनके बेटे की उंगली बचाई जा सकती थी। परिवार का मानना है कि अगर उंगली तुरंत डॉक्टर के पास पहुंच जाती, तो उसे जोड़ा जा सकता था और वासु एक सामान्य जीवन जी सकता था।

स्कूल प्रशासन की सफाई

दूसरी ओर, स्कूल प्रबंधन ने इस आरोप का खंडन किया है। उनका कहना है कि छात्र की उंगली का केवल ऊपरी हिस्सा कटा था और तत्काल चिकित्सा प्रदान की गई थी। स्कूल में उस दिन एक मेडिकल कैंप भी लगा हुआ था, जहां बच्चे का प्राथमिक इलाज किया गया और फिर उसे मेडिकल कॉलेज भेजा गया। 

जांच और आगे की कार्रवाई

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला अधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने बताया कि पूरे मामले की जांच चल रही है और रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

वासु तिवारी की यह दुखद कहानी एक ओर जहाँ स्कूल प्रशासन की संभावित लापरवाही को उजागर करती है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल उठाती है कि क्या हमारे स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं। इस घटना ने वासु के परिवार की ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया है। छोटी सी लापरवाही ने एक मासूम बच्चे को दिव्यांग बना दिया, और उसके परिवार को जीवनभर के लिए एक गहरी चोट दे दी। अब देखना यह है कि इस मामले में जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकलता है और क्या दोषियों को सज़ा मिलती है या नहीं।

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