हिंडनबर्ग ने दावा किया कि बुच दंपत्ति ने ऑफशोर फंड्स में निवेश किया था, जिसे बाद में विनोद अदाणी द्वारा स्टॉक की कीमतें बढ़ाने के लिए उपयोग किया गया। इस रिपोर्ट के प्रकाश में आने के बाद अदाणी ग्रुप की सभी 10 कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिसमें अदाणी एनर्जी के शेयरों में 17 प्रतिशत की भारी गिरावट हुई।
हिंडनबर्ग के आरोप: सेबी चेयरपर्सन के खिलाफ गंभीर दावे
हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों में कहा गया है कि सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने बरमूडा और मॉरीशस स्थित ऑफशोर फंड्स में निवेश किया था। इन फंड्स का इस्तेमाल अदाणी ग्रुप की कंपनियों की स्टॉक कीमतों में हेरफेर करने के लिए किया गया। हिंडनबर्ग का दावा है कि व्हिसल ब्लोअर दस्तावेजों के आधार पर यह जानकारी सामने आई है, जिसमें फंड्स को राउंड-ट्रिप करने और कीमतें बढ़ाने के प्रयास का खुलासा हुआ।
अदाणी ग्रुप पर प्रभाव: शेयर बाजार में लाल निशान
सोमवार को बाजार खुलते ही अदाणी ग्रुप की सभी प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। अदाणी एनर्जी के शेयर 17 प्रतिशत तक गिर गए, जबकि अदाणी टोटल गैस के शेयर 13.39 प्रतिशत तक लुढ़क गए। एनडीटीवी और अदाणी पावर के स्टॉक्स में भी क्रमशः 10 प्रतिशत और 10.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
माधबी पुरी बुच का खंडन: चरित्र हनन का आरोप
हिंडनबर्ग के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने इन दावों का सख्ती से खंडन किया। उन्होंने इसे सेबी की विश्वसनीयता पर हमला और "चरित्र हनन" का प्रयास बताया। बुच ने स्पष्ट किया कि उनके और उनके पति के किसी भी प्रकार के हेरफेर में शामिल होने का कोई आधार नहीं है, और इस तरह के आरोप बेबुनियाद और झूठे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी: आगे की राह मुश्किल
अदाणी ग्रुप के शेयरों में आई इस भारी गिरावट के बाद निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। शेयर बाजार में अदाणी ग्रुप की स्थिति और हिंडनबर्ग के आरोपों का निपटारा कैसे होता है, इस पर निवेशकों की नज़रें टिकी रहेंगी।

