भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छग , बिलासपुर के पास एक छोटा सा गाँव, चिस्दा, हाल ही में एक ऐसी घटना का गवाह बना जिसने पूरे गाँव को हिला कर रख दिया। एक महीने पहले अपने प्रेमी की आत्महत्या से सदमे में आई एक नाबालिग लड़की ने आखिरकार खुद भी फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।
प्रेमी की मौत का गहरा सदमा
14 जुलाई की सुबह, अविनाश यादव नाम के एक नाबालिग लड़के ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने उसकी प्रेमिका हेमा को गहरे सदमे में डाल दिया। प्रेमी की मौत से टूटी हुई हेमा ने भी मौत को गले लगाने का फैसला कर लिया था, लेकिन परिवार की चौकसी के चलते उसे तब बचा लिया गया। उसने मल्टीविटामिन सिरप पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी, लेकिन समय रहते उसे अस्पताल ले जाया गया और उसकी जान बचा ली गई।
मामा के घर भी नहीं बदला मन
हेमा की माँ ने उसे इस सदमे से उबारने के लिए अपने भाई के घर भेज दिया। उम्मीद थी कि वहाँ वह अपने दुख से उबर पाएगी। लेकिन, अविनाश की यादें उसका पीछा कर रही थीं। कुछ दिनों बाद, उसने मामा के घर के कुएं में कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया। इस बार भी परिवार ने उसे बचा लिया। उसे समझाने के बाद वापस चिस्दा भेज दिया गया, लेकिन इस बार हेमा के इरादे अडिग थे।
अंतिम निर्णय: फांसी के फंदे पर लटकी मिली
आज सुबह गाँव के एक बेर के पेड़ पर, हेमा का शव साड़ी से बने फंदे पर लटकता हुआ मिला। यह दृश्य देखकर परिवार का दिल दहल गया। पूरे गाँव में इस घटना से सनसनी फैल गई है, और हेमा के परिवार में मातम का माहौल छा गया है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर से समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि किस तरह का मानसिक और भावनात्मक संघर्ष इन नाजुक उम्र के बच्चों को सहना पड़ता है, और कैसे हम उनकी मदद कर सकते हैं।
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