भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : हाल ही में, रिजर्व बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला किया है। हालांकि, इस स्थिरता के बावजूद, सरकारी बैंकों ने अपने कर्ज के दरों में वृद्धि का निर्णय लिया है। विशेषकर, केनरा बैंक (KENRA BANK) , यूको बैंक (UCO BANK ) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB)ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 5 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की घोषणा की है।
MCLR में वृद्धि का असर
1. **अधिक खर्च**: इस बढ़ोतरी के बाद, होम, ऑटो और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों को अधिक ब्याज का भुगतान करना पड़ेगा। इससे उनकी मासिक किस्तों (EMI) में वृद्धि होगी।
2. **क्रेडिट की लागत**: MCLR बढ़ने से बैंकों को लोन (LOAN) की लागत बढ़ जाएगी, जिससे नए लोन की ब्याज दरें भी अधिक होंगी।
कब से लागू होगा यह बदलाव?
- **बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक**: 12 अगस्त 2024 से
- **यूको बैंक**: 10 अगस्त 2024 से
MCLR की अवधारणा
2016 में RBI द्वारा पेश की गई MCLR व्यवस्था, बैंकों के लिए एक बेंचमार्क दर के रूप में कार्य करती है। यह तय करती है कि बैंक न्यूनतम ब्याज दर के नीचे ऋण (LOAN) नहीं दे सकते। जब MCLR बढ़ता है, तो इसका सीधा असर ऋण लेने वाले ग्राहकों की कुल लागत पर पड़ता है।
इस बदलाव के साथ, बैंकों की वित्तीय रणनीतियों और ग्राहकों की कर्ज की लागत में महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा। आपको सलाह दी जाती है कि आप अपने मौजूदा और संभावित लोन की योजनाओं पर पुनर्विचार करें और आवश्यकतानुसार समायोजन करें।
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