दुर्ग : शादी के नाम पर 17.5 लाख की ठगी, व्यवसायी को सात लोगों ने मिलकर बनाया शिकार, विवाह एजेंट और जालसाजों की सोची-समझी योजना का खुलासा...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : शादी के नाम पर एक व्यवसायी परिवार को 17.5 लाख रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया। यह मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का है, जहाँ एक परिवार अपने बेटे के लिए स्वजातीय कन्या की तलाश में था। इस मासूम खोज का फायदा उठाकर सात लोगों के एक गिरोह ने पूरी योजना बनाई और धीरे-धीरे उनके विश्वास को तोड़ा।

ठगी की प्रारंभिक योजना

दुर्ग के व्यवसायी अरुण कुमार (परिवर्तित नाम) के परिवार को उनके बेटे की शादी के लिए अपने ही समुदाय की लड़की की जरूरत थी। इसी दौरान, परिवार का संपर्क महावीर जैन से हुआ, जिसने उन्हें इंदौर की विवाह एजेंट सरला जाधव से मिलवाया। सरला ने पूर्वा भारती जैन नामक लड़की का बायोडाटा भेजा, जिसे स्वजातीय कन्या बताकर विवाह के लिए उपयुक्त बताया गया। इस पर दिनेश के परिवार ने लड़की को देखने इंदौर जाने का फैसला किया।

झूठे रिश्तेदारों की भूमिका

जब अरुण कुमार का परिवार इंदौर पहुँचा, तो वहां उन्हें एक व्यक्ति मिला जिसे पूर्वा का भाई बताया गया। रिश्ता तय कराने की एवज में एजेंट सरला ने 1.5 लाख रुपये की मांग की। परिवार ने शुरुआत में 11 हजार रुपये मुंह दिखाई के रूप में दिए। इसके बाद रिश्ते को पक्का करने के लिए 9 अप्रैल को पूर्वा के पिता के रूप में शांतिलाल गांधी और उसके बड़े भाई महावीर का परिचय कराया गया। पूरी योजना इतनी कुशलता से बनाई गई थी कि दिनेश का परिवार पूरी तरह से विश्वास में आ गया।

शादी का खर्च और ठगी

शादी तय होने के बाद सरला ने अरुण के परिवार से विवाह का पूरा खर्च उठाने की मांग की, जो लगभग 16 लाख रुपये था। दिनेश के परिवार ने पहले 5.5 लाख रुपये दिए और बाकी रकम शादी के समय देने का वादा किया। इसके बाद पूर्वा और उसका कथित परिवार 23 अप्रैल को दुर्ग आ गए और सगाई संपन्न हुई। इस मौके पर उन्होंने 3 लाख रुपये और वसूल लिए। अंततः 3 मई को इंदौर के एक होटल में शादी करवाई गई, जिसका खर्च भी अरुण के परिवार से लिया गया। कुल मिलाकर शादी और अन्य खर्चों के नाम पर 17.5 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।

ठगी का पर्दाफाश

शादी के बाद अरुण ने अपनी नई पत्नी पूर्वा से आधार कार्ड की मांग की, लेकिन उसने बहाने बनाना शुरू कर दिया। इससे दिनेश को शक हुआ, और मामले की गहराई से जांच की तो पता चला कि वह शादी एक जालसाजी थी। जांच में सामने आया कि पूर्वा का असली नाम भारती नरगावेप है, जबकि एजेंट सरला का असली नाम सरला जाधव उर्फ हर्षा था। पूर्वा का कथित भाई संतोष शर्मा निकला, और महावीर गांधी असल में शिवराज जाधव था। 

पुलिस में शिकायत

अरुण ने अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस से की, जिसके बाद कोतवाली थाने में सातों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। 

यह घटना यह दर्शाती है कि कैसे समाज में धोखाधड़ी के नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। शादी जैसे पवित्र संबंध का दुरुपयोग कर लोगों की भावनाओं और पैसे का शोषण किया जा रहा है। इस प्रकार के मामलों में सतर्कता और जानकारी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच हो सकता है।

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