भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : यूपी गाजियाबाद यह घटना जो दहेज और घरेलू हिंसा का शिकार हुई। मेरठ की सरिता की बर्बाद हुई जिंदगी और उसकी मां का न्याय के लिए संघर्ष अत्यंत दुखद है। आइए, इस घटना को और विस्तार से समझते हैं:
घटना का सारांश
सरिता का विवाह
सरिता की शादी फरवरी 2023 में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत हुई थी। उसके पति धर्मेंद्र के बारे में बिचौलिए ने गलत जानकारी दी, जिसमें कहा गया था कि उसके पास अपना घर और अच्छी नौकरी है। हकीकत में, धर्मेंद्र किराए के घर में रह रहा था।
शादी के बाद का जीवन
शादी के एक महीने बाद से सरिता के ससुराल वाले
दहेज की मांग करने लगे। उसके भाई नरेंद्र ने बताया कि वे एक लाख रुपये और बाइक की
मांग कर रहे थे। जब सरिता ने अपनी मां को बताया कि उसके पास पैसे नहीं हैं,
तब
उसके ससुराल वाले उसे मारते-पीटते थे।
सरिता की मां ने आरोप लगाया कि उसके पति धर्मेंद्र का अपनी भाभी अनीता से अनैतिक संबंध है, जिसके कारण वह अपनी पत्नी को घर में नहीं रखना चाहता था।
तेजाब का हमला
16 अगस्त को, सरिता के पति और जेठानी ने उसे तेजाब पिलाया। इस पर पुलिस में शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और सरिता को फिर से ससुराल भेज दिया गया। 6 दिन तक बिना ईलाज के रखा गया फिर सरिता को इस स्थिति में अस्पताल लाया गया, लेकिन ससुराल वालों ने उसे फिर से मायके भेज दिया। कहने लगे इस जिन्दा लाश का हम क्या करेंगे अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर के अंदर गले से लेकर आंत तक जलने के कारण गंभीर चोटें आई हैं। सर्जरी करनी होगी | बचने की संभावना काफी कम है|
पुलिस और न्याय का संघर्ष:
जब सरिता की हालत और खराब हुई, तो उसके परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। सरिता केवल ग्लूकोज और पानी पर निर्भर थी और उसे जीवित रहने के लिए संघर्ष करना पड़ा। अंततः, 29 सितंबर को उसकी सर्जरी होनी थी, लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत हो गई।
मां का संघर्ष
जांच और कार्रवाई
सरिता की मौत के बाद, पुलिस ने उसके पति और जेठानी को गिरफ्तार कर लिया, जबकि जेठ फरार है। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है, लेकिन परिवार को अभी भी न्याय की प्रतीक्षा है।
यह मामला केवल सरिता का नहीं, बल्कि ऐसे कई मामलों का प्रतिनिधित्व करता है जहां महिलाएं दहेज और घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। समाज को इन मुद्दों पर ध्यान देने और नकारात्मक परंपराओं के खिलाफ खड़ा होने की आवश्यकता है। सवाल यह है की आखिर कब दहेज़ के दानव हमारी बेटियों के साथ इतनी बर्बरता करते रहेंगे ?जरा सोचिये तेजाब के किसी अंग पर छीटे आने से ही इंसान की हालत ख़राब हो जाती है |41 दिनों तक सरिता ने कैसे संघर्ष किया होगा ?
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