भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में चिटफंड कंपनियों में फंसे अपने पैसों की वापसी की मांग कर रहे निवेशकों ने एक अनूठा आंदोलन शुरू किया है। इन निवेशकों की ओर से बड्स एक्ट 2019 को लागू करने की पुरजोर मांग की जा रही है, जिसके अंतर्गत ठगी पीड़ितों को उनकी जमा राशि की सुरक्षा और वापसी का आश्वासन दिया गया था।
धरना प्रदर्शन और जेल भरो आंदोलन
लगातार 22 दिनों से हाकी मैदान के पास धरना दे रहे ये निवेशक, रविवार को अपने आंदोलन को एक नया मोड़ देते हुए "जेल भरो" आंदोलन की ओर बढ़े। इस आंदोलन में सैकड़ों की संख्या में पुरुष और महिलाएं शामिल हुए, जिन्होंने अपनी गिरफ्तारी दी। पुलिस द्वारा केरा रोड के बैरिस्टर भवन के पास लगाए गए बैरिकेड्स ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन आंदोलनकारी दृढ़ता से अपनी मांगों पर अड़े रहे। अंततः, तहसीलदार द्वारा उन्हें मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
ज्ञापन सौंपा प्रधानमंत्री के नाम
आंदोलनकारियों ने प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें बड्स एक्ट 2019 को लागू करने और चिटफंड कंपनियों में फंसे धन की वापसी की मांग की गई। ज्ञापन में यह उल्लेख किया गया कि सरकार ने 2019 में ठगी पीड़ितों को उनकी जमा राशि के 2 से 3 गुना तक की वापसी की गारंटी दी थी, लेकिन अब तक इस कानून के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। कई राज्यों में सरकार बनने के बावजूद भी पीड़ितों का पैसा वापस नहीं मिला है।
आंदोलन की अगली रणनीति
आंदोलन के प्रमुख सलाहकार, अधिवक्ता शिवनारायण कर्ष ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनका संगठन इस मामले को लेकर केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार और भी उग्र कदम उठाने की योजना बना रहा है। उनका उद्देश्य है कि जब तक बड्स एक्ट 2019 पूरी तरह लागू नहीं होता और पीड़ित निवेशकों का पैसा वापस नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
यह संघर्ष सिर्फ पैसों की वापसी का नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के विश्वास की पुनर्स्थापना का भी है, जो अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित समझकर इन कंपनियों में निवेश करते हैं। इस आंदोलन ने प्रदेश में निवेशकों के अधिकारों की सुरक्षा पर एक नई बहस छेड़ दी है।
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