पेरासिटामोल , हाई बीपी सहित 53 दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल: CDSCO की चिंताजनक रिपोर्ट और दवा उद्योग में हड़कंप...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ हाल ही में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की हैजिसमें बताया गया है कि बुखार की सामान्य दवा पेरासिटामोल सहित 53 दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में विफल हो गई हैं। इस रिपोर्ट ने दवा उद्योग और स्वास्थ्य क्षेत्र में चिंता की लहर पैदा कर दी है।

 

गुणवत्ता परीक्षण में विफल दवाओं की सूची

 CDSCO हर महीने कुछ दवाओं का चयन कर उनके गुणवत्ता परीक्षण करता है। इस बार की जांच में निम्नलिखित दवाएं शामिल थीं:

 1. पैरासिटामोल (500 एमजी)

2. ग्लिमेपिराइड (मधुमेह की दवा)

3. टेल्मिसर्टन (हाई ब्लड प्रेशर की दवा)

4. शेल्कल (विटामिन सी और डी3 की टैबलेट्स)

5. पैन-डी (एंटीएसिड)

6. सेपोडेम एक्सपी 50 (बैक्टीरियल संक्रमण के लिए) 

इन दवाओं का निर्माण विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों जैसे कि हेटेरो ड्रग्सएल्केम लैबोरेटरीजऔर कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड ने किया है।

 प्रमुख समस्याएं

 1. पैरासिटामोल की गुणवत्ता संबंधी चिंताएँ प्रमुखता से सामने आई हैं। यह दवा आमतौर पर बुखार और दर्द में उपयोग की जाती है।

2. ग्लिमेपिराइड और टेल्मिसर्टन जैसी दवाएंजो मधुमेह और उच्च रक्तचाप के उपचार के लिए महत्वपूर्ण हैंभी जांच में फेल हो गईं हैं।

3. बच्चों के लिए दी जाने वाली सेपोडेम एक्सपी 50 दवा की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है।

 कंपनियों की प्रतिक्रिया

 इन दवाओं के निर्माताओं ने जांच में विफल होने की जिम्मेदारी लेने से इंकार करते हुए कहा कि ये दवाएं नकली हैं और उनका असली उत्पाद परीक्षण में नहीं लाया गया है।

 पहले से बैन की गई दवाएं

 इससे पहले, अगस्त में CDSCO ने 156 फिक्स डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं पर प्रतिबंध लगाया था। इन दवाओं में एसेक्लोफेनाक और पैरासिटामोल के विभिन्न संयोजन शामिल थे। यह कदम दवा के गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था।

CDSCO द्वारा जारी की गई यह रिपोर्ट दवा उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मरीजों की सुरक्षा के लिए दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। आने वाले समय में इस समस्या को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।

 इस प्रकार की घटनाएं न केवल स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि जनता के विश्वास को भी हिला सकती हैं। सही दवा की पहचान और उसकी गुणवत्ता की जांच करना सभी के लिए आवश्यक है।

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