भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : (छग) भिलाई , क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान गणेश की मूर्तियाँ, जो अक्सर विशाल रूप में देखी जाती हैं, एक नाखून के बराबर भी छोटी हो सकती हैं? भिलाई के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार डॉ. अंकुश देवांगन ने इस कल्पना को साकार करते हुए दुनिया की सबसे छोटी मूर्तियाँ बनाई हैं। उनके द्वारा निर्मित मूर्तियाँ इतनी छोटी हैं कि एक उंगली के नाखून पर एक नहीं बल्कि आठ मूर्तियाँ रखी जा सकती हैं। इन सूक्ष्म मूर्तियों में भगवान गणेश के विभिन्न रूप जैसे नटराज, त्रिमुखी, पंचमुखी, अष्टविनायक और गजानन महाराज शामिल हैं।
डॉ. देवांगन का यह प्रयास केवल कला का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक महत्वपूर्ण संदेश छिपा है—जल प्रदूषण को रोकने का। गणेश विसर्जन के दौरान बड़े आकार की मूर्तियाँ जलाशयों को प्रदूषित करती हैं, जबकि छोटे आकार की मूर्तियाँ प्रदूषण को कम करने में सहायक हो सकती हैं।
सूक्ष्म कला के विश्व रिकॉर्ड धारक
डॉ. अंकुश देवांगन को 2004 में ही दुनिया की सबसे छोटी मूर्तियाँ बनाने के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान प्राप्त हो चुका है। उन्होंने सरसों के दाने से भी बीस गुनी छोटी गणेश प्रतिमा (0.4 मिलीमीटर) का निर्माण किया, जो अब लंदन के गिनीज बुक कार्यालय में संग्रहीत है। इसके अलावा, उन्होंने उंगली के नाखून पर पच्चीस प्रतिमाओं को प्रदर्शित कर कला के क्षेत्र में नई ऊंचाइयाँ हासिल की हैं।
उनकी बनाई हुई सूक्ष्म मूर्तियाँ हर धर्म और संस्कृति के महापुरुषों और देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को भी प्रदर्शित करती हैं। आज तक वे 5000 से अधिक सूक्ष्म मूर्तियाँ और चावल के दानों पर पेंटिंग्स बना चुके हैं, जिन्हें केवल माइक्रो पावर लेंस के सहारे देखा जा सकता है।
समाज सेवा में कला का योगदान
अंकुश देवांगन केवल सूक्ष्म मूर्तियाँ बनाने में ही नहीं, बल्कि विशाल कलाकृतियाँ और मूर्तियाँ बनाने में भी निपुण हैं। भिलाई के सिविक सेंटर में कृष्ण-अर्जुन रथ, पंथी चौक, श्रमवीर चौक, और अन्य स्थानों पर उनकी विशाल मूर्तियाँ सजी हुई हैं। उनकी ये कृतियाँ छत्तीसगढ़ और भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थापित की गई हैं, जो उनके अद्वितीय कला कौशल की पहचान हैं।
लेकिन उनकी कला का महत्व सिर्फ शिल्प तक सीमित नहीं है। वे छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में पिछले 36 वर्षों से बच्चों को कला के माध्यम से सृजनशील बनाने के लिए प्रशिक्षण दे रहे हैं, ताकि वे हिंसा से दूर रह सकें। डॉ. देवांगन का मानना है कि यदि उनकी कला से एक भी बच्चा हिंसा के रास्ते से बचा, तो उनका प्रयास सफल होगा।
कला का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
डॉ. अंकुश देवांगन छत्तीसगढ़ के पहले कलाकार हैं, जिन्हें नई दिल्ली स्थित ललित कला अकादमी के कार्यकारी बोर्ड में शामिल किया गया। उनकी कला और समाजसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें न केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है।
अंकुश देवांगन का जीवन और कला उन तमाम कलाकारों के लिए प्रेरणा है, जो कला को समाज सेवा और सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध करने के साधन के रूप में देखते हैं।
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