भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : ( छग )भिलाई ,भिलाई नगर पालिका निगम ने सोमवार को अतिक्रमण के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस कार्यवाही के तहत, जीई रोड के किनारे चंद्रा मौर्या टाकीज से लेकर निगम के जोन क्रमांक तीन कार्यालय तक अवैध कब्जों को हटाया गया। इस दौरान करबला समिति द्वारा बनाए गए दुकानों, स्वागत द्वार और अन्य धार्मिक एवं व्यावसायिक निर्माणों को बुलडोजर से ढहा दिया गया।
कार्रवाई की शुरुआत
सोमवार की सुबह 5 बजे से भिलाई नगर निगम की टीम ने भारी पुलिस बल के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। करबला समिति की ओर से निर्मित दुकानों, मजार के स्वागत द्वार और मस्जिद की बाउंड्री वॉल को भी तोड़ा गया। निगम ने इस पूरे अभियान में 10 जेसीबी, 30 डंफर और 2 चेन माउंटर का उपयोग किया। मौके पर एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार समेत 100 से ज्यादा जवानों और कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात थी।
हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
यह संपूर्ण कार्रवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर की गई। अवैध कब्जे को लेकर पहले एक याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने दुर्ग कलेक्टर को 120 दिनों में निर्णय लेने का निर्देश दिया। इसके बाद, निगम ने तीन दिन पहले कब्जेदारों को नोटिस जारी किया, जिसमें अवैध निर्माण को स्वयं से हटाने के लिए कहा गया था। लेकिन नोटिस के बावजूद कब्जे नहीं हटाए गए, जिसके चलते निगम ने यह कदम उठाया।
भिलाई निगम के अपर आयुक्त अशोक द्विवेदी ने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में कार्रवाई से पहले विधिवत नोटिस दिया जाता है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी कब्जा नहीं हटाने पर निगम को अपनी ओर से लीगल कार्रवाई करनी पड़ी।
धार्मिक और सामाजिक कब्जों पर भी कार्रवाई
निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी एक प्रकार के कब्जे तक सीमित नहीं रहेगा। चाहे कब्जा धार्मिक हो, सामाजिक हो या व्यक्तिगत, सभी को हटाया जाएगा। भिलाई नगर निगम का उद्देश्य शहर को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त बनाना है। अफसरों ने बताया कि करबला समिति को पहले ही कब्जा हटाने का नोटिस दिया गया था, लेकिन समिति द्वारा यह निर्देश पालन में नहीं लाया गया।
1984 में साडा (स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) द्वारा करबला समिति को जीई रोड के किनारे मस्जिद निर्माण के लिए 500-800 वर्ग फीट जमीन दी गई थी। लेकिन समय के साथ समिति द्वारा करीब ढाई एकड़ जमीन पर अवैध निर्माण किए गए, जिसमें दुकानों, एक बड़ा गेट, और शादीघर भी शामिल हैं।
करबला समिति का विरोध
करबला समिति ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि 1957 से यह जमीन मुस्लिम समाज के धार्मिक उपयोग में है और पिछले 25 सालों से यहां सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उनका यह भी सवाल है कि जब निर्माण कार्य हो रहा था, तब इसे क्यों नहीं रोका गया।
भिलाई नगर निगम द्वारा की गई यह अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई अब तक की सबसे बड़ी मानी जा रही है। निगम का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार ही यह कार्रवाई की गई है और शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।
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