भिलाई : महादेव सट्टा एप मामले में दो पत्रकारो का नाम हुआ उजागर , जान पहचान की आड़ में चाय विक्रेता को झांसे में लेकर उसके खाते से किया करोड़ों का अवैध लेन-देन अब दोनों फरार...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ के भिलाई में ऑनलाइन सट्टा एप "महादेव" से जुड़े एक और बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने इस मामले में दो कथित पत्रकारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने चाय बेचने वाले व्यक्ति के नाम पर बैंक खाता खोलकर उसका दुरुपयोग किया। इस खाते से 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का संदिग्ध लेन-देन हुआ। 

 घटना की शुरुआत

धीरज महतो, जो कि भिलाई के गदा चौक इलाके में चाय की दुकान चलाते हैं, ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। धीरज का कहना है कि उसकी मुलाकात गोविंदा चौहान और रविकांत मिश्रा नामक दो व्यक्तियों से हुई, जो खुद को पत्रकार बताते थे। इन दोनों ने धीरज और उसके दोस्त मुकेश तांडी को यह कहकर अपने नाम से बैंक खाता खुलवाने के लिए मना लिया कि वे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाएंगे। लेकिन खाता खुलवाने के बाद इन कथित पत्रकारों ने मोबाइल नंबर अपना इस्तेमाल कर खाते का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।

खाते का दुरुपयोग

धीरज ने जब अपने खाते की जानकारी लेनी चाही, तो उसे बताया गया कि उसके खाते में मोबाइल नं अपडेट होने में दिक्कत हो रही है है इसलिए उनलोग ने बैंक में अपना नं दिया है कहकर खाता और एटीएम को अपने पास रख लिया | इसी बीच जब धीरज ने बैंक जाकर जानकारी जुटाई जहाँ बैंक मैनेजर ने उसे सूचित किया कि खाता मुंबई से होल्ड कर दिया गया है खाते में बड़े पैमाने पर अवैध ट्रांजेक्शन हो रहे हैं। जिससे और भी शक गहरा गया। 

पुलिस की कार्रवाई

जांच के बाद पुलिस ने धीरज महतो और मुकेश तांडी को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान इन दोनों ने कथित पत्रकार गोविंदा चौहान और रविकांत मिश्रा के नाम का खुलासा किया, जो इस सट्टा घोटाले में उनके साथ शामिल थे। पुलिस ने इन दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, लेकिन वे फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

महादेव सट्टा एप के खिलाफ कार्रवाई

छत्तीसगढ़ पुलिस लंबे समय से ऑनलाइन सट्टा एप "महादेव" के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जिससे जुड़े कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। इस एप के माध्यम से लोग अवैध तरीके से लाखों रुपये की सट्टेबाजी में लिप्त हैं। 

पुलिस का मानना है कि गोविंदा चौहान और रविकांत मिश्रा जैसे लोग इसी नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं, जो फर्जी खातों के माध्यम से अवैध धन को सफेद कर रहे हैं। इस मामले की जांच अभी भी जारी है और पुलिस अन्य संभावित संलिप्त लोगों को भी ढूंढ रही है।

यह मामला केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी के अवैध धंधे को नहीं दर्शाता, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे भोले-भाले लोगों को फंसाकर उनके नाम और पहचान का दुरुपयोग किया जाता है। यह जरूरी है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए और लोगों को जागरूक किया जाए ताकि वे इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार न बनें।

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