भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : नई दिल्ली, दिल्ली के शकरपुर मार्केट में मोबाइल पार्टी देने से इनकार करना एक 15 वर्षीय लड़के की जान पर भारी पड़ गया। उसके ही दोस्तों ने सरेआम बाजार में दौड़ाकर चाकू मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद से इलाके में सनसनी फैल गई है, और पुलिस ने इस दर्दनाक घटना को लेकर मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी दोस्तों की पहचान कर ली गई है, और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
पार्टी न देने पर बर्बरता
मामला तब शुरू हुआ जब मृतक सचिन, जो कि कक्षा 9 में पढ़ाई कर रहा था, अपने दोस्तों के साथ मार्केट में नया मोबाइल खरीदने गया था। मोबाइल खरीदने के बाद, उसके दोस्तों ने मोबाइल की पार्टी की मांग की। जब सचिन ने पार्टी देने से मना कर दिया, तो मामूली विवाद ने खतरनाक मोड़ ले लिया। तीनों दोस्त उस पर गुस्सा हो गए और उसे समोसे की दुकान के पास सरेआम दौड़ा-दौड़ाकर चाकू से हमला करना शुरू कर दिया।
जानलेवा हमले की सजीव गवाही
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने बाजार के बीचो-बीच सचिन का पीछा किया, उसे लगातार चाकू मारे, जब तक कि उसकी मौत नहीं हो गई। स्थानीय लोग खून से लथपथ सचिन को अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस क्रूरता ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी।
मासूम की जान ली दोस्ती ने
सचिन की मां का कहना है कि उनका बेटा घर से यह कहकर निकला था कि उसे पेपर देना है। उसे क्या पता था कि वह वापस लौटकर कभी घर नहीं आएगा। मां के अनुसार, सचिन की कई दोस्तों से अच्छी-बुरी संगति थी, पर किसी से कोई दुश्मनी या रंजिश की जानकारी नहीं थी। घटना के समय परिवार को एक फोन आया जिसमें बताया गया कि सचिन का एक्सीडेंट हो गया है, लेकिन सच्चाई उससे कहीं अधिक भयावह निकली।
पुलिस की जांच
डीसीपी अपूर्वा गुप्ता ने बताया कि शाम 7:15 बजे के आसपास पेट्रोलिंग कर रही पुलिस टीम को समोसे की दुकान के पास खून के धब्बे दिखे। पूछताछ के बाद पता चला कि कुछ लड़कों ने एक अन्य लड़के पर चाकू से हमला किया और उसे अस्पताल भेजा गया। इसके बाद एलएनजेपी अस्पताल से मौत की सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, और आरोपी दोस्तों की तलाश की जा रही है।
समाज पर सवाल
इस घटना ने समाज के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक मोबाइल पार्टी न देने पर दोस्त हत्या तक उतर सकते हैं? आज के युवाओं में गुस्सा और हिंसा की यह प्रवृत्ति चिंताजनक है। ऐसे मामलों में केवल कानून का डर ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज की सही दिशा में भूमिका भी अहम है।
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