भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : भिलाई के प्रेम चंद्राकर ने 10वीं तक पढ़ाई की, लेकिन आज वह छत्तीसगढ़ का एक बड़ा साइबर ठग बन चुका है। दो साल पहले पुणे काम के लिए जाने वाला प्रेम एक ठगी गिरोह के संपर्क में आया, जिसने उसे महज 15 दिनों की ट्रेनिंग दी। यह ट्रेनिंग उसके लिए ठगी की दुनिया में पहला कदम साबित हुई। धीरे-धीरे प्रेम ने खुद का ठगी गिरोह शुरू किया और आज वह पुणे में कॉल सेंटर चलाकर शेयर मार्केट में निवेश और गूगल रिव्यू के झांसे में फंसा कर लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुका है।
करोड़ों की ठगी से ऐशो-आराम की जिंदगी
मिडिया रिपोर्ट्स ठगी के पैसों से प्रेम ने छत्तीसगढ़ के पचेड़ा गांव में 80 लाख का आलीशान घर बनवाया। इसके साथ ही पुणे और अहमदाबाद में जमीनें भी खरीदीं। उसे महंगी गाड़ियों का शौक है, और वह बीएमडब्ल्यू, थार, जगुआर जैसी गाड़ियाँ किराए पर लेकर शौक पूरा करता है। अपने शहर आने-जाने के लिए फ्लाइट का इस्तेमाल करता है।
पुलिस की पकड़: साइबर क्राइम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
प्रेम ने रायपुर की एक महिला, श्वेता मेहरा, से 8 लाख से ज्यादा की ठगी की थी। उसकी शिकायत के बाद पुलिस ने प्रेम की गतिविधियों पर नजर रखी और उसे गिरफ्तार किया। छत्तीसगढ़ पुलिस ने पुणे, कोलकाता, और इंदौर में छापेमारी कर प्रेम समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों के खातों में 70 लाख रुपये होल्ड किए गए हैं और 500 से ज्यादा फर्जी बैंक खाते ब्लॉक किए गए हैं, जिनमें 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन हुआ है।
ठगी का नेटवर्क: दस्तावेजों और सिम कार्ड का दुरुपयोग
प्रेम के गिरोह ने ठगी को अंजाम देने के लिए कई साधनों का उपयोग किया। कोलकाता के सोमनाथ सरदार, जो च्वॉइस सेंटर चलाता था, ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम से फर्जी बैंक खाते खोलता था। उसने अब तक 500 से ज्यादा खाते खोलकर उन्हें ठगों को बेचा, जिनमें रायपुर की एक इंजीनियर रश्मि सिंह के नाम से 88 लाख रुपये जमा किए गए।
दुर्ग के पुरुषोत्तम देवांगन, जो निजी टेलीकॉम कंपनी का एजेंट है, ठगों को सिम बेचने का काम करता था। वह ग्राहकों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी सिम कार्ड तैयार करता था। उसने प्रेम को 300 से ज्यादा सिम कार्ड बेचे, जिससे लाखों की ठगी की गई। पुलिस ने उससे 600 सिम कार्ड जब्त किए हैं।
यह मामला दर्शाता है कि साइबर ठगी एक जटिल नेटवर्क बन चुकी है, जिसमें सामान्य से दिखने वाले लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस की जांच और सख्ती के बावजूद ठग नए-नए तरीके ढूंढते रहते हैं। इसीलिए आम लोगों को सतर्क रहकर, ऑनलाइन गतिविधियों में सावधानी बरतनी चाहिए।
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