भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित मोटर व्हीकल एक्ट के संशोधन कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ सकते हैं, जो सड़कों पर सुरक्षा, नियमों के पालन और राइड-हेलिंग सेवाओं को लेकर स्पष्टता बढ़ाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। इन प्रस्तावों में से कई ऐसे हैं जो 16-18 वर्ष की उम्र के युवाओं के लिए, मोटरसाइकिलों के व्यवसायिक उपयोग के लिए और शैक्षणिक संस्थानों की बसों को लेकर गंभीर बदलाव कर सकते है। आइए इन प्रमुख प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा करते हैं:
16-18 वर्ष के युवाओं के लिए स्कूटर-मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव 16 से 18 साल के युवाओं को 50 सीसी क्षमता वाले मोटरसाइकिल या इलेक्ट्रिक स्कूटर जिनकी मोटर पावर 1500 वॉट तक है, को 25 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से चलाने की अनुमति देता है। यह अनुमति अंडरएज ड्राइविंग की समस्या से निपटने के लिए एक समाधान के रूप में लाई जा रही है। इससे युवा एक सुरक्षित गति सीमा में वाहन चलाने का अनुभव ले सकेंगे, बिना नियमों का उल्लंघन किए। यह प्रावधान खासतौर से उन युवाओं के लिए बनाया गया है, जो स्कूल या अन्य जरूरतों के लिए छोटे वाहनों का इस्तेमाल करना चाहते हैं।
मोटरसाइकिल का कमर्शियल उपयोग और एग्रीगेटर्स का लाभ
मंत्रालय ने मोटरसाइकिलों को कमर्शियल कैरिज के रूप में इस्तेमाल किए जाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे एग्रीगेटर्स जैसे रैपिडो और उबर मोटरसाइकिल टैक्सियों का उपयोग कर सकें। अभी तक केवल कारें और ऑटो-रिक्शा जैसे वाहनों को कमर्शियल कैरिज की मान्यता थी, लेकिन अब मोटरसाइकिल भी इस श्रेणी में शामिल हो जाएंगी। इससे राइड-हेलिंग सेवाओं के कानूनी ढांचे में स्पष्टता आएगी और राज्यों में मोटरसाइकिलों के इस्तेमाल पर लगी रोक भी हटाई जा सकेगी। इससे शहरी क्षेत्रों में कम दूरी के लिए मोटरसाइकिल टैक्सी सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ेगा, जो न केवल समय की बचत करेगा बल्कि यातायात की भीड़ को कम करने में भी सहायक होगा।
मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्राईब्यूनल्स के लिए समय सीमा
मोटर एक्सीडेंट मामलों के निपटारे को तेज करने के उद्देश्य से, ट्राईब्यूनल्स को 12 महीने के भीतर केस निपटाने की समय-सीमा दी जाएगी। यह कदम पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय की त्वरित प्राप्ति सुनिश्चित करेगा। इससे मोटर वाहन दुर्घटनाओं से जुड़े लंबित मामलों की संख्या कम हो सकेगी और लोग जल्दी से जल्दी मुआवजा प्राप्त कर सकेंगे।
शैक्षणिक संस्थानों की बसों पर सख्त नियम
शैक्षणिक संस्थानों द्वारा छात्रों और कर्मचारियों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए प्रयोग की जाने वाली बसों के लिए एक नई परिभाषा प्रस्तावित की गई है। इसके तहत अब ड्राइवर को छोड़कर छह या उससे अधिक लोगों को ले जाने वाले वाहनों पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाएगा, जिनका इस्तेमाल शिक्षण संस्थान द्वारा किया जा रहा हो। सड़क सुरक्षा और जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए, अगर ऐसे वाहन ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो उन पर दोगुनी पेनल्टी लगाने का प्रस्ताव है। यह संशोधन न केवल संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाएगा बल्कि ड्राइवरों को भी सख्त नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करेगा।
कैब एग्रीगेटर्स और ड्राइवर प्रशिक्षण केंद्रों के लिए समय-सीमा
कैब एग्रीगेटर्स, ऑटोमेटेड टेस्ट स्टेशनों और मान्यता प्राप्त ड्राइवर प्रशिक्षण केंद्रों के लिए राज्यों को आवेदन की प्रोसेसिंग के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा। अगर राज्य इस समय सीमा में कार्रवाई नहीं करते हैं, तो केंद्र सरकार की गाइडलाइंस लागू होगी। यह पहल व्यवसायों के लिए स्पष्टता और त्वरित प्रक्रियाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाई गई है, जिससे लाइसेंस और संचालन से जुड़े मुद्दों का समय पर समाधान हो सके।
हल्के मोटर वाहनों का रीक्लासिफिकेशन
मोटर व्हीकल एक्ट में प्रस्तावित संशोधन हल्के मोटर वाहनों (LMV) की नई परिभाषा और उनके ग्रॉस वेट के आधार पर रीक्लासिफिकेशन को भी प्रस्तावित करता है। इससे वाहनों की कैटेगरी में अधिक स्पष्टता आएगी और नई श्रेणियों के आधार पर उन्हें बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सकेगा।
थ्री-व्हीलर वाहनों की परिभाषा
एक और महत्वपूर्ण संशोधन थ्री-व्हीलर वाहनों को परिभाषित करने को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट के एक केस के बाद मंत्रालय ने थ्री-व्हीलर्स की सही परिभाषा तय करने का प्रस्ताव दिया है, ताकि उन्हें स्पष्ट रूप से मोटर वाहन श्रेणी में शामिल किया जा सके।
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