छग में 33,000 शिक्षक भर्ती की मांग पर संकट: डीएड-बीएड अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन और सरकार से टकराव, उम्र सीमा से जूझते हजारों युवाओं का सड़कों पर संघर्ष....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में डीएड-बीएड अभ्यर्थियों द्वारा 33,000 शिक्षक भर्ती की मांग पर जारी हड़ताल और आंदोलन ने प्रदेश में एक बड़ा मुद्दा खड़ा कर दिया है। मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक शिक्षक बनने की तैयारी की है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी के कारण हजारों युवाओं की उम्र सीमा पार हो रही है, जिससे वे नौकरी के लिए अयोग्य हो रहे हैं।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

भर्ती प्रक्रिया में देरी: छत्तीसगढ़ की सरकार ने विधानसभा सत्र 2024 में 33,000 शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी। उस समय बृजमोहन अग्रवाल शिक्षा मंत्री थे और उन्होंने इस घोषणा को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी साझा किया था। लेकिन लगभग एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस भर्ती प्रक्रिया को शुरू नहीं किया गया, जिससे अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश उत्पन्न हो गया है।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें

1.भर्ती प्रक्रिया में देरी और ओवर एज की समस्या : समय पर भर्ती न होने के कारण कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा पार हो गई है। इन अभ्यर्थियों की मांग है कि उन्हें आयु सीमा में अतिरिक्त छूट प्रदान की जाए ताकि वे अब भी नौकरी के योग्य बने रहें।

 2. विधानसभा सत्र में घोषित भर्ती प्रक्रिया: 33,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को जल्द से जल्द प्रारम्भ किया जाए, जिसमें सभी संकायों और विषयों के पद शामिल हों। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस भर्ती में विषयवार चयन किया जाना चाहिए ताकि हर विषय के उम्मीदवारों को अवसर मिले।

  3. स्कूल बंद करने के निर्णय का विरोध: सरकार द्वारा 4077 स्कूलों को बंद करने के निर्णय पर अभ्यर्थियों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि युक्तियुक्तकरण के नाम पर इस निर्णय को केवल स्थगित नहीं बल्कि पूरी तरह निरस्त किया जाए।

4.शिक्षा विभाग का सेटअप बहाल किया जाए : 2008 के सेटअप को यथावत रखते हुए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को तुरंत प्रारम्भ करने की मांग की जा रही है, ताकि प्रदेश के स्कूलों में शिक्षक नियुक्तियों की कमी को पूरा किया जा सके।

   5. आरक्षित वर्ग के लिए छूट: आगामी भर्ती में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 5% की छूट प्रदान की जाए ताकि उनका भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

6. छत्तीसगढ़ी भाषा में पीजी डिप्लोमा धारकों के लिए पद सृजित किए जाएं: प्रदेश के स्कूलों में छत्तीसगढ़ी भाषा में पीजी डिप्लोमा प्राप्त अभ्यर्थियों के लिए भी नए पदों का सृजन किया जाए ताकि इन उम्मीदवारों को भी रोजगार के अवसर मिल सकें।

आंदोलन का विस्तार

यह आंदोलन पिछले एक महीने से अनिश्चितकालीन हड़ताल के रूप में जारी है, और प्रदेश के 33 जिलों में फैल चुका है। पहले जिला और ब्लॉक स्तर पर ज्ञापन सौंपे गए, उसके बाद विधायकों को भी ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद आंदोलनकारियों ने "न्याय यात्रा" निकाली, फिर भी जब उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो उन्होंने प्रदेश स्तर पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।

वर्तमान स्थिति

19 अक्टूबर को हजारों डीएड-बीएड अभ्यर्थियों ने सीएम हाउस घेरने की कोशिश की। लेकिन पुलिस द्वारा बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद ये अभ्यर्थी सड़कों पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे, ताकि सरकार को सद्बुद्धि आए और उनकी मांगें पूरी हों। आंदोलनकारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे नेशनल हाईवे पर चक्काजाम करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

युवाओं की नाराजगी

अभ्यर्थियों का कहना है कि भाजपा के संकल्प पत्र और मोदी की गारंटी में भी शिक्षक भर्ती का वादा किया गया था, लेकिन अभी तक इसे पूरा नहीं किया गया। वे इस बात से बेहद नाराज हैं कि समय बीतने के साथ उनकी उम्र सीमा पार हो रही है और वे नौकरी के लिए अयोग्य हो रहे हैं। उनका कहना है कि अगर अब भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होती है, तो लगभग 50,000 और अभ्यर्थी इस साल अपात्र हो जाएंगे। पिछले 15 सालों से आर्ट्स विषय में कोई भर्ती नहीं निकली है, जिससे 70,000 से अधिक अभ्यर्थी पहले ही नौकरी के लिए अपात्र हो चुके हैं।

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