भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन 4 अक्टूबर को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। यह ऑपरेशन दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिलों की सीमा पर हुआ, जहां करीब 1000 जवानों ने 2 घंटे की मुठभेड़ में 31 नक्सलियों को मार गिराया। मारे गए नक्सलियों में से 16 की पहचान हो चुकी है, जिन पर 1.30 करोड़ रुपये का इनाम था।
ऑपरेशन की रणनीति और सफलता
यह ऑपरेशन सटीक खुफिया जानकारी और बेहतरीन योजना पर आधारित था। सूत्रों के मुताबिक, नक्सलियों की कंपनी नंबर 6 के 50 से अधिक सदस्यों की मौजूदगी की जानकारी मिली थी, जो अबूझमाड़ के थुलथुली क्षेत्र में थे। इसके बाद अधिकारियों ने इंटर डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन के तहत ऑपरेशन की योजना बनाई। ऑपरेशन के लिए पांच जिलों के बेहतरीन जवानों को चुना गया, जिनमें दंतेवाड़ा और नारायणपुर के DRG और STF के 1,000 से अधिक जवान शामिल थे।
जवानों ने भारी बारिश और दुर्गम पहाड़ी इलाकों को पार करते हुए नक्सलियों के ठिकाने पर हमला किया। बारिश की वजह से नक्सलियों को जवानों के आने का अंदेशा नहीं हो पाया, जिससे जवानों को घेराबंदी करने में मदद मिली।
मुठभेड़ के दौरान की स्थिति
जवानों ने 40 किलोमीटर तक पैदल चलकर ऑपरेशन की साइट तक पहुंच बनाई। ऑपरेशन की शुरुआत के 15 मिनट के अंदर ही 7 नक्सलियों को ढेर कर दिया गया। मुठभेड़ के दौरान नक्सली भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जवानों ने चारों ओर से घेरकर उन्हें मार गिराया। अंततः 31 नक्सलियों के शव बरामद किए गए, जिनमें 13 महिलाएं और 18 पुरुष थे।
डीआरजी की महत्वपूर्ण भूमिका
ऑपरेशन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका जिला रिजर्व गार्ड (DRG) की रही, जिनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्होंने पहले नक्सलियों के रूप में कार्य किया था। इन लोगों को जंगलवार की ट्रेनिंग थी और वे नक्सलियों के कोड को आसानी से समझ सकते थे। इसी वजह से डीआरजी ने जवानों को सही दिशा में मार्गदर्शन किया और एसटीएफ को सहयोग प्रदान किया।
बड़ी सफलता के संकेत
ऑपरेशन के बाद मौके से कई अत्याधुनिक हथियार, जैसे LMG, AK-47, SLR, इंसास, और अन्य हथियार बरामद किए गए हैं। माना जा रहा है कि इस ऑपरेशन में कई बड़े कैडर के नक्सली मारे गए हैं।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ जारी लड़ाई
यह इस साल का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेशन था। इससे पहले अप्रैल 2024 में कांकेर में 29 माओवादी मारे गए थे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यह आश्वासन दिया था कि 2026 तक बस्तर क्षेत्र को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया जाएगा। पिछले 9 महीनों में 188 माओवादी मारे जा चुके हैं, जिससे सरकार और सुरक्षा बलों के हौसले बुलंद हैं।
नक्सलवाद का अंत कब तक?
छत्तीसगढ़ में 60,000 से अधिक जवान तैनात हैं, जो नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। इस ऑपरेशन की सफलता ने यह साबित किया है कि सुरक्षा बलों की रणनीति सटीक है और नक्सलियों का खात्मा अब दूर नहीं है।
मैगी से जीवन की ऊर्जा
जहां अन्य लोग इस पूरी घटना को सिर्फ एक मुठभेड़ के रूप में देख सकते हैं, वहीं जवानों की ये यात्रा संघर्ष, धैर्य और साहस का प्रतीक है। लंबी दूरी पैदल चलने और कड़ी परिस्थितियों में ऑपरेशन को अंजाम देने के बाद, जब जवान थकान से चूर हो जाते थे, तो उसी समय वे अपने छोटे स्टोव पर मैगी बनाते और उससे एनर्जी लेते थे। यह मैगी सिर्फ खाना नहीं था, बल्कि उनके लिए ऊर्जा का स्रोत था, जो उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता था।
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