पुलिस की पूछताछ में राजेंद्र ने बताया कि वह इंदौर के व्यापारी कपिल जैन के लिए काम करता है, जो उसे रोज़ाना 500 रुपये देता है।
राजेंद्र के अनुसार, कपिल जैन ने ही उसे सोना-चांदी गलाने की मशीन दी थी, और उसने इसी मशीन से दुर्ग में डकैती से लाए गए सोने को गलाया था। पुलिस कार्रवाई से पहले राजेंद्र का साथी आशीष पटलिया फरार हो गया।
राजेंद्र ने पुलिस को बताया कि कपिल जैन का एजेंट आशीष पटलिया ही उसे निर्देशित करता है। राजेंद्र ने यह भी खुलासा किया कि भंगुडावर, जगदीश मोहनिया, भूरसिंह दीपक सेंगर, अनिल चौहान, अनिल बघेल, गणपत डावर जैसे साथी चोरी-डकैती करते हैं और सोने-चांदी के गहने कपिल जैन तक पहुंचाते हैं। कपिल के कहने पर गहनों को गलाकर उसकी सिल्ली बनाई जाती थी।
पुलिस ने राजेंद्र की निशानदेही पर आशीष पटलिया के संभावित ठिकानों पर भी छापेमारी की। टीम ने धार के अमझेरा गांव तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन तब तक आशीष वहां से भाग निकला था।
इस पूरे मामले की शुरुआत 8 जून 2024 को दुर्ग में हुई एक डकैती से हुई, जिसमें गनियारी रोड के रसमड़ा निवासी दिलीप टिंबर ने FIR दर्ज करवाई थी। दिलीप ने बताया था कि 5 डकैतों ने उन्हें और उनकी पत्नी को बंधक बनाकर करीब 35 तोला सोना चुरा लिया। इसी तरह दुर्ग में एक और चोरी की घटना हुई थी, जिसमें 60 लाख रुपये के गहने और नकदी चोरी हुए थे।
पुलिस ने इन घटनाओं के आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की और पहले तीन आरोपियों, जगदीश उर्फ काला भाया, भंगूडावर और नूरसिंह चौहान को धार से गिरफ्तार किया। अन्य आरोपियों दीपक सेंगर, अनिल चौहान, अनिल बघेल, और गणपत हावर की तलाश जारी थी। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि चोरी और डकैती का सोना राजेंद्र कटार को सौंपा जाता था, जो उसे इंदौर के व्यापारी कपिल जैन तक पहुंचाता था।
जैसे ही इस गिरोह का इंदौर और आलीराजपुर से संबंध उजागर हुआ, पुलिस ने अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र के गुरुनानक कॉलोनी के पास चार महीने तक निगरानी रखी और धार, अमझेरा, अलीराजपुर और झाबुआ में भी सर्च अभियान चलाया। दुर्ग एसपी जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था, और जांच में पता चला कि दोनों घटनाओं को एक ही गिरोह ने अंजाम दिया है।
पुलिस को सूचना मिली थी कि कपिल जैन और आशीष पटलिया अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में रह रहे हैं। जब पुलिस ने उनके ठिकाने पर छापा मारा तो कपिल और आशीष भाग निकले, लेकिन राजेंद्र कटार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों को पकड़ने के लिए अपना अभियान जारी रखा है।






