भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक माँ ने अपने 19 दिन के नवजात शिशु की निर्मम हत्या कर दी। यह बच्चा आठ साल की मन्नतों और कई व्रतों के बाद जन्मा था। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, इस हत्याकांड का कारण एक डरावना सपना था जो माँ ने रात में देखा था।
घटना का विवरण
घटना की शुरुआत मंगलवार की देर रात से हुई, जब पुलिस को सूचना मिली कि एक नवजात शिशु की हत्या कर दी गई है। बच्चे की माँ, सरोज देवी, और दादी, मेवा देवी, के साथ सोते समय बच्चा अचानक गायब हो गया। पुलिस ने जांच शुरू की और बाद में पता चला कि बच्चे को पानी की टंकी में डुबोकर मारा गया था।
पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची, तो उन्हें बच्चे का शव पानी की टंकी में मिला। बच्चे की अवस्था इतनी भयावह थी कि उसे देखकर पुलिसवालों के रौंगटे खड़े हो गए। जांच में सरोज देवी पर शक की सुई अटक गई, और जब पुलिस ने उससे कड़ी पूछताछ की, तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
हत्याकांड का कारण
सरोज देवी ने पुलिस को दिए गए बयान में बताया कि आठ साल बाद उनके घर में बेटे का जन्म हुआ था। बेटे के लिए उसने कई व्रत किए थे और भगवान से मन्नतें मांगी थीं। परिवार में इस बच्चे का जन्म खुशी की वजह था, लेकिन घटना वाली रात सरोज देवी ने एक डरावना सपना देखा जिसने उसकी दुनिया बदल दी।
उसके अनुसार, सपने में उसने एक सफेद साड़ी पहनी महिला को देखा, जिसने उसे बताया कि उसका बच्चा अशुभ है और वह उनके पूरे घर को बर्बाद कर देगा। महिला ने सरोज से कहा कि उसे अपने बच्चे को मार देना चाहिए, नहीं तो उसके परिवार को अनर्थ का सामना करना पड़ेगा। सरोज देवी ने अपने सपने को सच मानते हुए अपने 19 दिन के बेटे को पानी की टंकी में डुबोकर मार दिया। हत्या के बाद वह फिर से सोने चली गई, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही डाबला पुलिस मौके पर पहुंची और तुरंत जांच शुरू की। पुलिस ने मां सरोज देवी को गिरफ्तार कर लिया है और जेल भेज दिया है। एएसपी गिरधारी लाल शर्मा ने बताया कि आरोपी महिला के बयान और सबूतों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। हालांकि, पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह घटना पूरी तरह से सपने का परिणाम थी या इसके पीछे और भी कोई मानसिक या पारिवारिक कारण थे।
मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलू
इस घटना ने समाज में एक बार फिर से मानसिक स्वास्थ्य और अंधविश्वास के मुद्दों को उजागर किया है। सरोज देवी का यह कदम अंधविश्वास और मानसिक दबाव का परिणाम हो सकता है। सपने को हकीकत मानकर ऐसा जघन्य अपराध करना, यह दर्शाता है कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता और समझ की कितनी कमी है।
पिता का दर्द
इस हत्याकांड में सबसे बड़ा झटका उस बच्चे के पिता, कृष्ण कुमार, को लगा है, जो एक दमकल कर्मचारी हैं। घटना के समय वह नाइट ड्यूटी पर थे और जब उन्हें इस भयावह घटना की जानकारी मिली, तो वह शोक में डूब गए। आठ साल बाद जन्मे उनके बच्चे की इस तरह मौत होने से परिवार बुरी तरह से टूट चुका है।
इस तरह के अपराध कई बार मानसिक दबाव, समाज की धारणाओं और गलतफहमी के कारण होते हैं। पुलिस अब इस मामले में आगे की जांच कर रही है, जिससे यह पता चलेगा कि क्या सरोज देवी मानसिक रूप से अस्थिर थी या उसने अंधविश्वास के चलते इस अपराध को अंजाम दिया।
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