भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : दुर्ग पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर स्लेवरी (गुलाम बनाकर ) के रैकेट का पर्दाफाश किया है।
- मूल मामला: दुर्ग पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर स्लेवरी के रैकेट का पर्दाफाश किया है। आरोपियों ने एक भिलाई निवासी युवक को लाओस भेजकर उसे साइबर ठगी की ट्रेनिंग दी थी।
- आरोपी: तीन आरोपी, जिनमें एक महिला भी शामिल है, को मुंबई से गिरफ्तार किया गया। ये आरोपियों ने भिलाई के युवक को साइबर क्राइम के लिए प्रशिक्षित किया था।
- प्रसार: यह गिरोह साउदी, दुबई, ओमान और कुवैत जैसे देशों में भी सक्रिय था और वहां साइबर ठगी के लिए भारतीय युवकों को भर्ती कर रहा था।
घटनाक्रम का विस्तार:
1. धोखाधड़ी का तरीका:
भिलाई निवासी पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसे लाओस में एक कंपनी में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी लगाने का वादा किया गया था, लेकिन उसके बदले उसे साइबर ठगी (स्कैम) की ट्रेनिंग दी गई। इस धोखाधड़ी के बदले आरोपियों ने उससे 2 लाख रुपये की रकम ली। इसके बाद उसे लाओस भेजा गया, जहां उसे फर्जी और धोखाधड़ी की गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया।
2. आरोपियों का नेटवर्क:
आरोपी साजन शेख और रफीक उर्फ रफी खान ने मिलकर एक गैर-लाइसेंसी कंपनी "VS ENTERPRISES MANPOWER CONSULTANCY PVT.LTD." बनाई थी। इस कंपनी के माध्यम से वे भारतीयों को लाओस, कंबोडिया, ओमान, और अन्य देशों में नौकरी लगाने का वादा करते थे। इसके बदले उन्होंने युवकों से भारी रकम वसूल की और उन्हें साइबर स्लेवरी के रूप में उपयोग किया।
3. मुंबई में गिरफ्तारियां:
दुर्ग पुलिस ने आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीम बनाई और उन्हें मुंबई में गिरफ्तार किया। गोरेगांव में छिपे हुए आरोपी साजन शेख और रफीक खान को दो दिन तक लगातार निगरानी रखने के बाद पकड़ लिया गया। एक महिला आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया, जो इन अपराधों में सहयोग कर रही थी।
4. पीड़ितों की संख्या और विदेशों में फंसे लोग:
पुलिस को पता चला कि लाओस में कम से कम 8-10 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। ये सभी साइबर स्लेवरी के तहत ठगी कर रहे थे और उन्हें वापस लाने के लिए इंटरपोल से मदद ली जाएगी।
5. साक्ष्य और जब्ती:
गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए, जिनका उपयोग इन अपराधों में किया जा रहा था। पुलिस ने इन फोन की जांच की और कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए।
पुलिस की कार्रवाई और प्रयास:
दुर्ग पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कार्रवाई की। पुलिस महानिरीक्षक दुर्ग रेंज चिराग जैन के मार्गदर्शन में, एसडीओपी बालोद देवांश सिंह राठौर, और डीएसपी श्रीमती शिल्पा साहू की नेतृत्व में पुलिस ने इस रैकेट का पर्दाफाश किया। पुलिस टीम ने तकनीकी साधनों, बैंक विवरण, और सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों का पता लगाया और उन्हें गिरफ्तार किया।
आरोपियों की पहचान:
- साजन शेख (उम्र 36, गोरेगांव पश्चिम, मुंबई)
- रफीक खान (उर्फ रफी खान) (उम्र 42, कुर्ला, मुंबई)
यह घटना केवल एक उदाहरण नहीं है, बल्कि यह उन हजारों भारतीय युवकों के लिए चेतावनी है, जो विदेशों में उच्च वेतन वाली नौकरियों का सपना देख रहे हैं। साइबर स्लेवरी और मानव तस्करी के इन गिरोहों का नेटवर्क देश-विदेश में फैला हुआ है, और इसके तहत युवकों को ठगने के लिए कई तरह की योजनाएं बनाई जाती हैं। विदेशों में रोजगार के नाम पर धोखाधड़ी: यहां प्रमुख बात यह है कि कई लोग विदेशों में नौकरी के लिए आकर्षक विज्ञापनों का शिकार हो जाते हैं। इन धोखाधड़ी कंपनियों द्वारा विज्ञापित उच्च वेतन, मुफ्त यात्रा और अन्य लाभों के लालच में, लोग बिना किसी उचित जांच-पड़ताल के इन कंपनियों से जुड़ जाते हैं। इसके बाद इन लोगों को धोखाधड़ी के लिए विदेश भेज दिया जाता है, जहां उन्हें साइबर अपराध और धोखाधड़ी की गतिविधियों में शामिल किया जाता है




