भगवान ऐसी औलाद किसी को न दे ! प्रॉपर्टी के लालच में बेटे और बहुये बुजुर्ग माँ बाप के साथ करते थे मारपीट , भूखा रख कहते - कटोरा लेकर भीख मांगो , तंग आकर दम्पति ने कर ली आत्महत्या....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : नागौर, राजस्थान के करणी कॉलोनी में रहने वाले बुजुर्ग दंपति हजारीराम विश्नोई (70) और उनकी पत्नी चावली देवी (68) ने पारिवारिक संपत्ति विवाद और घरेलू कलह से दुखी होकर पानी के टांके (टैंक) में कूदकर आत्महत्या कर ली। यह घटना पूरे इलाके में सदमे का कारण बन गई। पारिवारिक रिश्तों में कड़वाहट और संपत्ति विवाद ने इस बुजुर्ग दंपति को ऐसा दुखी कर दिया कि उन्होंने अपनी जीवनलीला समाप्त करने का निर्णय लिया।

घटना का विवरण:

दंपति के साथ पिछले कई महीनों से उनके बेटे और बहुओं द्वारा की जा रही मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाएं चल रही थीं। यह विवाद मुख्य रूप से संपत्ति से जुड़ा हुआ था, जिसमें उनके बच्चे प्रॉपर्टी हड़पने की कोशिश कर रहे थे। हजारीराम और चावली देवी इस स्थिति से अत्यधिक मानसिक और शारीरिक रूप से पीड़ित थे। 

सुसाइड नोट की चौंकाने वाली बातें:

इस आत्महत्या के मामले को और भी दुखद बना देने वाली बात यह है कि हजारीराम ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट लिखा था, जिसे घर की दीवारों पर जगह-जगह चिपकाया गया था। इस सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी पीड़ा को विस्तार से लिखा, जिसमें उनके बेटों, बहुओं और बेटियों द्वारा लगातार की जा रही मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का विवरण दिया गया। उन्होंने लिखा कि उनके बेटे और बहुएं न केवल उन्हें प्रताड़ित करते थे बल्कि उन्हें भोजन तक नहीं देते थे और मारपीट करते थे। 

सुसाइड नोट में एक दिल दहला देने वाली लाइन है, जो उनके बेटे द्वारा कही गई थी: "कटोरा ले लो और भीख मांगो। मैं तुम्हें खाना नहीं दूंगा। अगर किसी से शिकायत की तो मार डालूंगा।" यह वाक्य साफ तौर पर इस बात का संकेत है कि किस तरह से एक समय में अपने बच्चों को पालने-पोसने वाले माता-पिता अब उन्हीं बच्चों से तिरस्कार और अपमान का सामना कर रहे थे। 

पुलिस की प्रतिक्रिया:

नागौर पुलिस अधीक्षक नारायण टोगस ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो देखा गया कि पानी के टांके का ढक्कन खुला हुआ था और उसमें दंपति के शव तैर रहे थे। स्थानीय पड़ोसियों ने दो दिनों तक बुजुर्ग दंपति को नहीं देखा था, जिसके बाद उन्होंने इस बात की जानकारी उनके बेटे को दी। 

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घर की तलाशी ली, जिसमें उन्हें दीवारों पर चिपके सुसाइड नोट मिले। इसके बाद टांके की जांच की गई, जहां दंपति के शव मिले। शवों को टांके से निकालकर मोर्चरी में रखवाया गया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर अपनी जांच का दायरा विस्तृत कर दिया है। 

संपत्ति विवाद और पारिवारिक कलह:

हजारीराम और चावली देवी के चार बच्चे थे—दो बेटे और दो बेटियां। सुसाइड नोट में यह स्पष्ट लिखा गया है कि उनके सभी बच्चे उनकी संपत्ति के लिए आपस में लड़ रहे थे और इसके चलते उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। बुजुर्ग दंपति ने बताया कि उनके साथ पांच बार मारपीट की गई थी और उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। यह मारपीट उनके बेटों और बहुओं द्वारा की गई थी, जिससे वे अत्यधिक तनाव में आ गए थे।

समाज के लिए संदेश:

यह घटना समाज के लिए एक चिंतनशील संदेश छोड़ती है कि किस प्रकार वृद्धावस्था में माता-पिता, जो अपने बच्चों के लिए जीवनभर मेहनत करते हैं, अंत में उन्हीं बच्चों के हाथों अपमान और प्रताड़ना का शिकार होते हैं। बुजुर्गों की सुरक्षा और उनके सम्मान का ध्यान रखना समाज की जिम्मेदारी है, और ऐसी घटनाएं हमारे समाज के मूल्यों पर सवाल उठाती हैं। 

सरकार और समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा हो, और उन्हें ऐसे दुखद अंत तक पहुंचने से बचाया जा सके।

पुलिस की कार्रवाई और अगली जांच:

पुलिस ने दंपति द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट के आधार पर उन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, जिन पर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं। नागौर पुलिस की जांच जारी है, और एफएसएल टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य उठाए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस संपत्ति विवाद में और कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इसे किसी कानूनी प्रक्रिया के तहत सुलझाया जा सकता था। 

इस प्रकार, नागौर की इस घटना ने एक बार फिर से यह प्रश्न उठाया है कि हमारे समाज में पारिवारिक रिश्तों की बुनियाद कितनी कमजोर हो गई है और बुजुर्गों के प्रति हमारी जिम्मेदारी और कर्तव्यों का क्या स्तर है ?

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