रिसाली नगर निगम क्षेत्र में दुर्ग निगम का कचरा डंपिंग : अव्यवस्था पर उठे सवाल , स्थानीय जनप्रतिनिधियों की तीखी प्रतिक्रिया...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : भिलाई , हाल ही में दुर्ग नगर निगम के डंपर रिसाली नगर निगम क्षेत्र में कचरा फेंकते हुए पकड़े गए हैं। मिडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला तब प्रकाश में आया जब नेवई के कांग्रेस पार्षद परमेश्वर देवदास ने दुर्ग नगर निगम की गाड़ियों को पकड़ा। यह घटना बुधवार रात को हुई, जब देवदास को सूचना मिली कि दुर्ग नगर निगम की गाड़ियां फिर से कचरा लेकर पहुंची हैं।

घटना का विवरण

1. लगातार कचरा फेंकने की शिकायत :

   - 13 अक्टूबर से दुर्ग नगर निगम की गाड़ियां नेवई में लगातार कचरा फेंक रही थीं। 

   - चार दिन में ही 200 से अधिक गाड़ियां कचरा डंप कर चुकी थीं।

2. स्थानीय लोगों का विरोध :

   - देवदास ने गांव के 8-10 लोगों के साथ मिलकर विरोध किया और कचरा डंप कर रही गाड़ियों को रोक दिया। 

   - इस दौरान तीन ट्रक और दो जेसीबी मशीनें पकड़ी गईं।

3. पुलिस की भूमिका :

   - घटना की जानकारी मिलने पर नेवई टीआई को मौके पर बुलाया गया। 

   - दुर्ग निगम के कर्मचारियों ने बताया कि वे स्वास्थ्य अधिकारी धर्मेंद्र मिश्रा के आदेश पर कचरा डंप कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें समझाकर गाड़ियों को जाने दिया।

निगम पार्षदों का रोष

- रिसाली नगर निगम के पार्षदों में इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है। 

- कांग्रेस पार्षद देवदास का कहना है कि वे लंबे समय से खुले में कचरा डंप करने का विरोध कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय में समस्या

- कचरा डंपिंग का स्थान स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनिवर्सिटी के पास है, जहां से छात्रों और स्टाफ को बदबू और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है।

निगम प्रशासन की दलील

- दुर्ग नगर निगम के आयुक्त लोकेश चंद्राकर का कहना है कि कचरा भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) के कहने पर डंप किया जा रहा है। 

- बीएसपी ने प्रस्ताव दिया था कि वहां कचरा डंप करने के बाद वे पेड़ लगाएंगे।

 नियमों की अनदेखी

- नगर निगमों को अपने क्षेत्र का सूखा और गीला कचरा अपने SLRM सेंटर में ले जाने का नियम है, जहां उसे अलग कर खाद में बदला जाना चाहिए। 

- लेकिन निगम प्रशासन की लापरवाही के कारण कचरा खुले में फेंका जा रहा है।

यह घटना न केवल स्थानीय लोगों के लिए एक समस्या है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी खतरा उत्पन्न कर रही है। नगर निगमों को नियमों का पालन करते हुए उचित प्रबंधन के माध्यम से इस समस्या का समाधान करना चाहिए। NGT के नोटिस के बाद इस मामले की गंभीरता और बढ़ गई है, और अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस दिशा में क्या कदम उठाता है।

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