भिलाई में अस्पताल की घोर लापरवाही, घायल ढाई साल के बच्चे की ईलाज के दौरान मौत, बिना पोस्ट मार्टम के परिजनों को सौंपा शव , पुलिस को कब्र खोदकर करना पड़ा पोस्टमार्टम....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : भिलाई में एक बार फिर निजी अस्पताल की लापरवाही की गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें ढाई साल के एक मासूम की इलाज के दौरान मौत हो गई। अस्पताल ने बिना पोस्टमार्टम कराए बच्चे का शव परिजनों को सौंप दिया, जिससे परिजनों को घटना के बाद कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस मामले में पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा, जब उन्हें बच्चे की मौत की खबर मिली और शव को कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया।

घटना का विवरण : 

दुर्घटना दो दिन पहले जामुल से अहिवारा के बीच नंदनी एरोड्रम के पास हुई थी। एक स्कूटी और बाइक के बीच जोरदार टक्कर हुई, जिसमें बाइक सवार एक बुजुर्ग, नारायण प्रसाद वर्मा (58 वर्ष), की मौत हो गई। जबकि स्कूटर चालक और उसके पीछे बैठा ढाई साल का बेटा घायल हो गए। बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

लापरवाही का आरोप:

मृतक बच्चे विनय साहू के दादा खेमलाल साहू का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें बच्चे की मौत की सूचना नहीं दी। अस्पताल ने शव सीधे परिजनों को सौंप दिया, जिससे वे बच्चे का अंतिम संस्कार कर सके। खेमलाल साहू ने कहा कि उन्हें अस्पताल से किसी भी प्रकार की प्रक्रिया की जानकारी नहीं दी गई।

पुलिस का हस्तक्षेप:

जब पुलिस को बच्चे की मौत के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने कुरुद के मुक्तिधाम में बच्चे के शव को कब्र से बाहर निकालने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस ने तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम कराया। नंदिनी थाना प्रभारी मनीष शर्मा ने कहा कि बच्चे की मौत के कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम कराना जरूरी था। 

अस्पताल की जिम्मेदारी:

पोस्टमार्टम टीम के इंचार्ज डॉक्टर ने कहा कि अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर की जिम्मेदारी थी कि वह बच्चे की मौत के बाद पुलिस और परिजनों को इसकी सूचना देते। यह सुनिश्चित करना आवश्यक था कि सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएं।

यह घटना न केवल अस्पताल की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि ऐसे मामलों में उचित प्रक्रिया का पालन कितना आवश्यक है। परिजनों को सही जानकारी और सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वे उचित निर्णय ले सकें। इस तरह की घटनाओं से स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास डगमगा सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लेना आवश्यक है।

 

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