CG : ग्रामीण क्षेत्रों में जीवनरक्षा की नई पहल: हृदय गति रुकने पर अब ग्रामीण देंगे CPR, आयुष विभाग का बड़ा कदम...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में अचानक हृदय गति रुकने पर ग्रामीणों द्वारा जान बचाने के प्रयासों को नया आयाम दिया जा रहा है। आयुष विभाग के इस प्रयास का उद्देश्य ग्रामीणों को सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) और अन्य आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित करना है, ताकि गांवों में दुर्घटना या आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। इससे ग्रामीणों के बीच आपातकालीन चिकित्सा कौशल का विकास होगा, जो कठिन परिस्थितियों में जीवन रक्षक साबित हो सकता है।


सीपीआर क्या है?

सीपीआर एक आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की दिल की धड़कन या सांस अचानक रुक जाती है। यह प्रक्रिया हृदय गति को फिर से बहाल करने में मदद करती है और व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण होती है। सीपीआर के दौरान छाती पर नियमित दबाव और सांस देने की प्रक्रिया की जाती है, जिससे शरीर के अंगों में ऑक्सीजनयुक्त रक्त का प्रवाह बना रहता है।

क्यों जरूरी है CPR?

जब किसी व्यक्ति की सांस या धड़कन रुक जाती है, तो उसका शरीर ऑक्सीजन प्राप्त करना बंद कर देता है। इसकी वजह से शरीर की कोशिकाएं, विशेषकर मस्तिष्क की कोशिकाएं, तेजी से मरने लगती हैं। कुछ ही मिनटों के भीतर मस्तिष्क को स्थायी नुकसान हो सकता है या व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। इस स्थिति में समय पर सीपीआर दिया जाए, तो यह व्यक्ति की जान बचा सकता है। अध्ययनों से पता चला है कि सीपीआर देने का कौशल जितने अधिक लोगों में होगा, उतनी ही अधिक जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रम: एक विस्तृत योजना

आयुष विभाग के द्वारा ग्रामीणों को सीपीआर सिखाने का कार्य आयुष्मान आरोग्य मंदिर के डॉक्टरों और कर्मचारियों के सहयोग से किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत निमोरा के ठाकुर प्यारेलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पंचायत एंड रूरल डेवलपमेंट में की गई है। सोमवार से प्रारंभ होकर बुधवार तक चलने वाले इस प्रशिक्षण सत्र में डॉक्टर्स और कर्मचारियों को सीपीआर के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रियाओं में निपुण बनाया जाएगा।

प्रशिक्षण के दौरान ग्रामीणों को सीपीआर के अलावा निम्नलिखित आपातकालीन परिस्थितियों में प्राथमिक उपचार सिखाया जाएगा:

- सांप या बिच्छू के काटने पर प्राथमिक चिकित्सा।

- पानी में डूबने की स्थिति में आपातकालीन उपाय।

- सड़क हादसों में घायल व्यक्ति को तुरंत उपचार देना।

- अचानक बेहोश हो जाने या हृदय रोग की स्थिति में त्वरित कदम उठाना।

ग्रामीणों की सजगता: समय की आवश्यकता

ग्रामीण इलाकों में मेडिकल सुविधा तुरंत उपलब्ध नहीं हो पाती है। इस कारण प्राथमिक उपचार का महत्व और भी बढ़ जाता है। सीपीआर जैसी तकनीकों को सीखकर ग्रामीण तब तक मदद कर सकते हैं, जब तक पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल या विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं नहीं मिलतीं। यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि सही समय पर दी गई प्राथमिक चिकित्सा कई बार मौत और जीवन के बीच का अंतर साबित हो सकती है।

समाज में जागरूकता और जीवनरक्षा

आयुष विभाग के इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समाज में आपातकालीन स्थितियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यदि अधिक से अधिक ग्रामीण सीपीआर और प्राथमिक चिकित्सा की ट्रेनिंग ले लेते हैं, तो समाज में आपातकालीन स्थितियों में मरने वालों की संख्या में कमी आ सकती है। यह पहल न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में, बल्कि पूरे समाज में जागरूकता फैलाने का एक प्रभावी तरीका है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का आधार मजबूत होगा।

आने वाले बदलाव

यह कार्यक्रम एक बड़ा बदलाव ला सकता है, जहां लोग न केवल अपने परिवार और गांव की रक्षा कर सकेंगे, बल्कि दूसरों की मदद के लिए भी तत्पर रहेंगे। आयुष विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सजगता और जानकारी से कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। 

इस प्रकार, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल एक आवश्यक कदम है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण भी पैदा करेगा। आयुष विभाग का यह कदम एक आदर्श उदाहरण है कि कैसे सामान्य लोग भी थोड़ी सी जानकारी और प्रशिक्षण से आपातकालीन परिस्थितियों में किसी की जान बचा सकते हैं।

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