छग से यूपी पहुंची बारात, 1.25 लाख रूपये महीना कमाने वाले इंजिनियर दुल्हे के 'सरकारी नौकरी में न होने की बात कह कर दुल्हन ने फेरे लेने से किया इंकार...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में एक शादी का मंडप तब चर्चा का विषय बन गया जब दुल्हन ने प्राइवेट जॉब करने वाले इंजीनियर दूल्हे से शादी करने से इनकार कर दिया। दूल्हा भले ही हर महीने 1.25 लाख रूपये कमाता हो, लेकिन दुल्हन की जिद थी कि वह सरकारी नौकरी वाला जीवनसाथी ही चुनेगी। इस अप्रत्याशित निर्णय से बारात बैरंग लौट गई।  

कैसे शुरू हुई कहानी?

मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार छत्तीसगढ़ के बलरामपुर के रहने वाले दूल्हे का परिवार वर्तमान में कन्नौज में किराए के मकान में रहता है। बिचौलिए के जरिए फर्रुखाबाद की एक युवती से रिश्ता तय हुआ था। लड़की वालों को बताया गया था कि लड़का सरकारी इंजीनियर है और उसके पास 20 बीघा खेती की जमीन भी है। इस जानकारी के आधार पर दोनों परिवारों ने शादी पक्की की।  

जयमाला तक सबकुछ ठीक था

शादी समारोह फर्रुखाबाद के गंगा गली स्थित एक गेस्ट हाउस में बड़े ही धूमधाम से चल रहा था। बारातियों का स्वागत शानदार तरीके से किया गया, और जयमाला का कार्यक्रम भी खुशी-खुशी संपन्न हुआ। लेकिन, रात करीब 1 बजे दुल्हन को यह सच पता चला कि दूल्हा सरकारी कर्मचारी नहीं है, बल्कि प्राइवेट सेक्टर में इंजीनियर है।  

दुल्हन ने क्यों किया इनकार?  

सच जानने के बाद दुल्हन गुस्से से भर गई। दूल्हे ने अपनी नौकरी और सैलरी का प्रमाण देने के लिए उसी समय अपनी सैलरी स्लिप मंगवाई और 1.25 लाख रूपये की मासिक आय का सबूत पेश किया। बावजूद इसके, दुल्हन अपनी बात पर अड़ी रही। उसका कहना था कि उसे केवल सरकारी नौकरी वाला ही जीवनसाथी चाहिए।  

समझाने की कोशिशें हुईं नाकाम 

दोनों पक्षों के परिवार और रिश्तेदारों ने दुल्हन को समझाने की पूरी कोशिश की। यहां तक कि समाज के बुजुर्गों ने भी मामले में हस्तक्षेप किया, लेकिन लड़की का फैसला नहीं बदला। आखिरकार, दूल्हा और बारातियों को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा।  

खर्चों का समझौता और समाज की प्रतिक्रिया 

इस घटनाक्रम के बाद समाज के कुछ वरिष्ठ लोगों ने दोनों पक्षों के खर्चों को आपसी सहमति से बांटने का सुझाव दिया, जिसे सभी ने मान लिया। हालांकि, इस घटना ने समाज में शादी को लेकर प्राथमिकताओं और विचारधाराओं पर बहस छेड़ दी है।  

इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सरकारी नौकरी का महत्व प्राइवेट नौकरी की तुलना में इतना ज्यादा है? क्या शादी जैसे रिश्ते में आर्थिक सुरक्षा ही प्राथमिकता होनी चाहिए, या फिर यह भावनाओं और समझदारी पर आधारित होना चाहिए?  

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