भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : दिल्ली में हाल ही में एक भयावह घटना घटित हुई है, जिसे देखते हुए लोग 2012 के वसंत विहार निर्भया कांड को याद कर रहे हैं। 34 वर्षीय एक महिला, जो ओडिशा की रहने वाली है और दिल्ली में एक समाजसेवी संस्था के लिए काम कर रही थी, उसके साथ तीन व्यक्तियों ने मिलकर सामूहिक बलात्कार किया।
इस दर्दनाक घटना की शुरुआत दिल्ली के आईटीओ क्षेत्र से हुई, जो पुराने पुलिस मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित है। पीड़िता को उसके साथी ने किसी काम के बहाने दिल्ली बुलाया था, परन्तु बाद में उसे छोड़ दिया गया। उसने दिल्ली में जीवनयापन के लिए एक समाजसेवी कार्य के तहत काम करना शुरू किया, लेकिन इसी बीच उसके साथ यह अत्याचार हुआ।
यह घटना 10 और 11 अक्टूबर की रात लगभग 9:30 बजे घटित हुई। आरोपियों ने सबसे पहले पीड़िता को ऑटो में बिठाकर राजघाट के पास गांधी स्मृति वाली सड़क पर ले गए, जहां उन्होंने बारी-बारी से उसके साथ दुर्व्यवहार किया। आरोपियों में से एक ऑटो चालक , कबाड़ी वाला और दिव्यांग भिखारी भी शामिल था जो पीड़िता को उस इलाके में लेकर गया और वहाँ भी उसके साथ दुष्कर्म किया। बार-बार किए गए इस अत्याचार से पीड़िता का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। अंततः, वह अर्धनग्न अवस्था में खून से लथपथ पैदल चलते हुए लगभग 2 KM राजघाट से सराय कालेखां तक पहुँच गई।
इस दौरान रिंग रोड पर कई गाड़ियाँ उस रास्ते से गुज़रीं, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। अंततः एक नौसेना के अधिकारी ने उसे देखा और पुलिस को इसकी जानकारी दी। पीड़िता की हालत इतनी खराब थी कि उसकी जान को भी खतरा हो सकता था, लेकिन समय रहते उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। वहाँ उसके निजी अंगों का ऑपरेशन हुआ और मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे मनोचिकित्सक विभाग में भर्ती कर दिया गया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस की टीम ने 21 दिनों तक कड़ी मेहनत की और तीन आरोपियों – ऑटो चालक प्रभु, कबाड़ी की दुकान पर काम करने वाला प्रमोद, और शमशुल लगड़ा को गिरफ्तार किया। दिल्ली पुलिस ने महिला सिपाही संगीता को सोशल वर्कर बनाकर पीड़िता से मिलवाया, जिसके बाद पीड़िता ने आपबीती सुनाई। इसके बाद, पुलिस ने आरोपी प्रभु का ऑटो और पीड़िता की खून से सनी सलवार भी गांधी स्मृति के पास वाली सड़क से बरामद कर ली।
पीड़िता को समाजसेवी काम दिलाने के बहाने दिल्ली बुलाया गया था। दिल्ली में उसके लिए कुछ दिन रहने और खाने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन बाद में साथी को उस पर आर्थिक भार महसूस होने लगा। इसके बाद, उसने किशनगढ़ थाना क्षेत्र में ननों के साथ रहना शुरू किया, परन्तु वहाँ उसकी मानसिक स्थिति में भी गड़बड़ी होने लगी। इस घटना के बाद उसे सड़क पर छोड़ दिया गया, और अंततः यह घटना घटित हुई।
इस घटना के बाद, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दिल्ली पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी दो शिकायतें दर्ज की गई हैं। पीड़िता का इलाज एम्स ट्रॉमा सेंटर में जारी है, और उसकी हालत में सुधार लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
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