अश्लील विडियो देखने के बाद 9 साल की बच्ची के साथ रेप फिर हत्या कर शव को 10 टुकड़ो में काटकर बोरे में भरकर छिपाया , दरिंदे को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : राजस्थान उदयपुर में 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में जिला अदालत ने मुख्य आरोपी को मौत की सजा सुनाई है। साथ ही, अदालत ने आरोपी के पिता और मामा को चार-चार साल के कठोर कारावास की सजा भी दी है। घटना के बाद आरोपियों ने बच्ची की हत्या कर उसके शव के दस टुकड़े किए और उन टुकड़ों को बोरे में भरकर एक खंडहर में छिपा दिया। 


केस डायरी के अनुसार, आरोपी को बचाने के लिए उसके पिता और मामा ने न केवल सबूतों में छेड़छाड़ की बल्कि शव को ठिकाने लगाने में भी मदद की थी। यह वारदात पिछले साल मार्च में मावली थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई थी।

29 मार्च 2023 को इस गांव से लापता हुई 9 साल की बच्ची के अंग अगले दिन खंडहर में 10 टुकड़ों में मिले थे। पुलिस ने मामले की जांच करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। केस की सुनवाई पॉक्सो अदालत में हुई, जहां एक हफ्ते पहले तीनों को दोषी ठहराया गया था। सोमवार को अदालत में

कमलेश की स्वीकारोक्ति ने इस केस की सभी परतें खोल दीं। पुलिस के सामने उसने विस्तार से बताया कि कैसे उसने पोर्न देखने के बाद इस घटना को अंजाम दिया था | बच्ची उसे राखी बांधती थी| अपने पिता और मामा के साथ मिलकर सबूत मिटाने की कोशिश की थी। बच्ची की रेप के बाद हत्या कर उसने उनके साथ मिलकर शव के 10 टुकड़े किए और उसे बोरे में भरकर खंडहर में छिपा दिया। इस नृशंस घटना ने पूरे गांव में सनसनी फैला दी थी, और लोगों में डर और आक्रोश की लहर दौड़ गई थी।

पॉक्सो अदालत में इस केस की सुनवाई तेजी से पूरी की गई, और एक हफ्ते पहले ही तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। सोमवार को कोर्ट ने इसे सबसे घिनौना अपराध मानते हुए कमलेश को फांसी की सजा सुनाई। वहीं, पिता और मामा को सबूतों से छेड़छाड़ और हत्या में सहयोग के लिए चार-चार साल की कठोर कैद दी गई। फैसला सुनाए जाने के बाद भी मुख्य आरोपी के चेहरे पर कोई पछतावा या तनाव नहीं दिखा, और उसने खुद को निर्दोष बताते हुए हाईकोर्ट में अपील की बात कही।

इस फैसले से गांव के लोगों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन बच्ची के परिवार का दुख कम नहीं हुआ है। वे अब भी उस भयावह घटना को भुलाने में असमर्थ हैं, जिसने उनके रिश्तों को तार-तार कर दिया। पुलिस का कहना है कि यह फैसला ऐसे अपराधियों के लिए एक सख्त संदेश है कि मासूमों के साथ होने वाली किसी भी नृशंसता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और कानून के शिकंजे से बचना नामुमकिन है।