बड़ी खबर : भिलाई में चर्चित अपराधी अमित जोश का एनकाउंटर: जयंती स्टेडियम के पास मुठभेड़ में पुलिस ने किया ढेर...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : भिलाई में गुरुवार शाम को चर्चित अपराधी अमित जोश की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। चार महीने पहले किए गए एक हमले के बाद से फरार चल रहे अमित ने जयंती स्टेडियम के पास पुलिस पर गोलीबारी की, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे मार गिराया। इस ऑपरेशन में पुलिस की क्राइम ब्रांच और एसीसीयू (Anti-Crime and Criminal Unit) की टीम शामिल थी। 

इससे पहले, अप्रैल में हुए एक गोलीकांड में अमित जोश ने तीन लोगों पर गोली चलाई थी, जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना के बाद पुलिस लगातार उसकी तलाश में थी, लेकिन अमित लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था। हाल ही में क्राइम ब्रांच को सूचना मिली कि अमित जयंती स्टेडियम के आसपास देखा गया है, जिसके बाद पुलिस की टीम ने उसे पकड़ने का प्रयास किया। 

जैसे ही पुलिस ने अमित को घेरने की कोशिश की, उसने उन पर फायरिंग कर दी। अपनी सुरक्षा में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें अमित ढेर हो गया। 

क्या था गोलीकांड मामला ?

चार महीने पहले भिलाई के ग्लोब चौक में एक गोलीकांड ने पूरे क्षेत्र में खलबली मचा दी थी। इस गोलीकांड में तीन बाइक सवार युवकों पर अमित जोश गैंग ने अचानक हमला कर दिया था, जिसमें से एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पुलिस ने गैंग के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि मुख्य आरोपी अमित जोश और उसके एक अन्य साथी की पुलिस तलाश कर रही थी।

विश्रामपुर निवासी रमनदीप सिंह अपने दोस्त सुनील यादव और आदित्य सिंह से मिलने भिलाई आया था। अपने दोस्त के आगमन की खुशी में तीनों ने देर रात तक पार्टी की और फिर टाउनशिप की ओर घूमने निकल गए। रमनदीप, सुनील, और आदित्य बाइक पर बैठकर आपस में शोर मचाते हुए मस्ती कर रहे थे, जब अचानक अमित जोश और उसके तीन साथियों ने अपनी बाइक उनकी बाइक के सामने रोक दी।

रमनदीप के दोस्तों के शोर को अमित जोश ने गाली समझ लिया, और गुस्से में आकर उसने गाली-गलौज करना शुरू कर दिया। सुनील और आदित्य ने यह सफाई दी कि वे अमित को गाली नहीं दे रहे थे, बल्कि आपस में मस्ती कर रहे थे। परंतु अमित जोश और उसके साथी इस पर भड़क गए। तैश में आकर अमित ने पिस्टल निकाल ली और उन पर फायर कर दिया। तीन राउंड फायरिंग में एक गोली आदित्य के फेफड़े के पास लगी और दूसरी सुनील के पेट में। घायल होते ही रमनदीप वहां से भाग गया।

गोलीबारी के बाद अमित और उसके साथी वहां से फरार हो गए। रमनदीप ने घायल सुनील और आदित्य को तुरंत बाइक पर बिठाकर चंदूलाल चंद्राकर अस्पताल पहुँचाया, लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उनका इलाज करने से इनकार कर दिया। मजबूरन उन्हें शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें रायपुर के मेकाहारा अस्पताल भेजने की सलाह दी। इस दौरान रमनदीप ने अपने दोस्त विवेक साहू और अन्य को मदद के लिए बुलाया और घायलों को एंबुलेंस से रायपुर पहुँचाया गया।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की। दो आरोपियों, अंकुर शर्मा और यशवंत नायडू, को गिरफ्तार किया गया। परंतु मुख्य आरोपी अमित जोश और उसका एक अन्य साथी फरार चल रहे थे। पुलिस उनकी तलाश में जुटी रही।

अमित जोश और उसके साथी भिलाई नगर एरिया में सक्रिय थे और उनकी पहचान अवैध गतिविधियों के लिए थी। इनका मुख्य धंधा बीएसपी के क्वार्टरों पर कब्जा जमाना और उन्हें किराए पर चढ़ाना था, जिससे वे अच्छी कमाई कर रहे थे। इस अवैध काम के कारण उनका क्षेत्र में डर और दबदबा था।




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