मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमित का पिता आर्ची एक सक्रिय गुंडा था, जो सोसाइटी के नाम पर लोगों से ऊंचे ब्याज दर पर पैसे उधार देता और फिर हिंसा और दबाव से उनका सामान और पैसा हड़प लेता था। अमित की मां भी पति के साथ इन अवैध कार्यों में शामिल थी और महिलाओं के साथ मारपीट तक करती थी। अमित ने अपने बचपन में अपने माता-पिता को लगातार अपराध करते देखा और यह सब उसकी जिंदगी का हिस्सा बन गया।
अमित की बहन प्रियंका जॉर्ज भी अपराध के इस माहौल में बड़ी हुई। वह न केवल अपराधियों का साथ देती थी बल्कि भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के क्वार्टर्स पर कब्जा कर उन्हें किराये पर चढ़ाने का काम भी करती थी। अमित ने बहन की शादी लकी जॉर्ज नामक एक अपराधी से करवा दी, जो बाद में अपराध की दुनिया का हिस्सा बन गया।
अमित ने मात्र 14 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रख लिया था। उसने पहली बार भिलाई नगर थाना क्षेत्र में एक लड़के के साथ मारपीट की थी, जो उसके अपराध के सफर की शुरुआत बनी। धीरे-धीरे उसने बीएसपी के कई ब्लॉकों पर कब्जा कर लिया और वहां अवैध रूप से किराये पर मकान चढ़ाने लगा। कहा जाता है कि उसने सेक्टर 6 के करीब 30 से अधिक मकानों पर कब्जा किया था।
अमित की जिंदगी में एक दिलचस्प पहलू यह था कि उसे टेडी बियर का बहुत शौक था। उसकी मां ने बताया कि अमित जहां भी जाता, वहां से टेडी बियर खरीदकर लाता था। इस वजह से उसके घर पर कई टेडी बियर मिले थे।
25-26 जून 2024 की रात अमित ने तीन लड़कों पर फायरिंग की थी, जिसमें रमनदीप सिंह, सुनील यादव और आदित्य सिंह घायल हो गए। इसके बाद से अमित फरार हो गया था। जब उसके जीजा लकी जॉर्ज जेल से बाहर आया, तो अमित चोरी-छुपे उससे मिलने पहुंचा। इस बात की खबर पुलिस को मिलते ही टीआई और एसीसीयू टीम ने उसे पकड़ने की योजना बनाई।
जब पुलिस ने अमित को पकड़ने की कोशिश की, तो उसने पुलिस पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। पुलिस की जवाबी फायरिंग में अमित को पैर में गोली लगी जवाबी कार्यवाई में आखिरकार, पुलिस ने उसे मार गिराया। यह दुर्ग जिले का चौथा एनकाउंटर था।
अमित के खिलाफ दुर्ग जिले के विभिन्न थानों में 36 से अधिक अपराध दर्ज थे। चार महीने से फरार रहने के कारण उसके ऊपर 35,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था।

