द्वितीय दिवस के कार्यक्रम का आकर्षण
इस दिन के कार्यक्रम में पूजन कार्य के साथ-साथ पंचपदी भजन और शाम को विशेष कीर्तन का आयोजन किया गया। श्री तुकाराम निकुम महाराज माऊलि, महाराष्ट्र के प्रसिद्ध कीर्तनकार, और श्री संत सेवा समिति नागपुर महल रोड भजन मंडली ने हरि पाठ एवं भजन प्रस्तुत किए। इस दौरान विशेष रूप से श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज के 28 अभंगों के बारे में ज्ञानवर्धक जानकारी भी दी गई, जो उपस्थित भक्तों के मन को भावविभोर कर गई।
श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज का जीवन और योगदान:
श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज का जन्म 1275 में महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के पैठण के पास, आपेगांव में हुआ था। उनकी माता रुक्मिणी बाई और पिता विट्ठल पंत थे। संत ज्ञानेश्वर ने अपने जीवन में कई अद्भुत चमत्कार किए, जिनमें सबसे प्रसिद्ध एक घटना है जब एक किसान अपने भैंसे 'ज्ञानू' के साथ निकला था और संत ज्ञानेश्वर ने उस भैंसे से वेद की ऋचाएँ उच्चारण करवा दी। इस घटना ने उनके दिव्य ज्ञान को और भी प्रकट किया।
एक और प्रसिद्ध घटना में चांगदेव नामक योगी ने संत ज्ञानेश्वर को चुनौती दी, जिस पर संत ज्ञानेश्वर ने अपनी दिव्य शक्ति से उसे शांत किया और उसकी अद्भुत योग-शक्ति का प्रतिकार किया। संत ज्ञानेश्वर की योग्यता और ज्ञान ने उन्हें युगों-युगों तक अमर बना दिया।
ज्ञानेश्वरी - भगवद्गीता का मराठी रूप:
संत ज्ञानेश्वर ने भगवद्गीता पर अपनी प्रसिद्ध टीका 'ज्ञानेश्वरी' लिखी, जो आज भी महाराष्ट्र में एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ मानी जाती है। उनके जीवन और कार्यों का आदर्श आज भी समाज में व्याप्त है, और उनके भक्त उन्हें 'ज्ञान के भगवान' के रूप में पूजते हैं।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति और आशीर्वाद
इस अद्भुत आयोजन में श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज के भक्तों का अपार स्नेह और आशीर्वाद मिला। इस दौरान अनेक प्रमुख व्यक्तियों ने अपने अनुभव साझा किए, जिनमें श्री नथूजी कोरडे, श्री गुणवंत हमदापुरे, श्री श्रीकांत भुताड, श्री नंदू महाराज वरलीकर, श्री प्रकाशराव शेळके, श्री गुरुदेव, श्री जयंताजी उपगडे, श्री गोपाल श्रीखंडेश्री शंकर राव पावडे और अन्य सम्माननीय भक्त शामिल थे।
श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज के इस आयोजन ने भक्ति और धार्मिकता के प्रति श्रद्धा को प्रगाढ़ किया। यह आयोजन उनके अद्वितीय जीवन और शिक्षाओं को फैलाने का एक महत्वपूर्ण अवसर था, जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने उनकी दिव्यता का अनुभव किया। संत ज्ञानेश्वर के जीवन और उनके कार्यों से प्रेरणा लेकर हम भी अपनी आत्मा को शुद्ध कर सकते हैं और जीवन में सुख-शांति प्राप्त कर सकते हैं।

