भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से एक दिल को छू लेने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है। जिले के पटना के करंजी गांव में एक महिला ने अपने दिवंगत पति को स्वयं मुखाग्नि दी, जिससे ग्रामीणों की आंखों में आंसू आ गए।
इस महिला का नाम श्यामपति राजवाड़े है, जो पिछले दो वर्षों से अपने पति कतवारी लाल राजवाड़े का कैंसर का इलाज करवा रही थी। इस संघर्ष में उन्होंने अपनी जमीन बेच दी, लेकिन इलाज के बावजूद उनके पति को नहीं बचाया जा सका।
कतवारी लाल की मृत्यु के बाद श्यामपति पर एक और संकट आ गया कि उनके अंतिम संस्कार की विधि कौन पूरी करेगा। उनकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए श्यामपति ने अपने भतीजे संतलाल से इस कार्य को करने के लिए निवेदन किया। हालांकि, संतलाल ने अंतिम संस्कार करने के बदले शर्त रख दी – या तो श्यामपति उसे पांच डिसमिल जमीन दे दें या फिर एक लाख रुपये। यह मांग श्यामपति के लिए अत्यंत कठिनाई भरी थी क्योंकि वह पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं।
श्यामपति ने संतलाल को 15 हजार रुपये देने की पेशकश की, जो कि उनके पास शेष बची जमीन से अर्जित आय थी, लेकिन संतलाल इस प्रस्ताव को ठुकरा कर अपनी मांग पर अडिग रहा। ऐसे में श्यामपति ने हिम्मत दिखाई और अपने पति की अंतिम यात्रा की जिम्मेदारी स्वयं लेने का निर्णय लिया।
उन्होंने अपने पति की अर्थी को कंधा दिया और उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए मुक्तिधाम तक पहुंचीं। वहां श्यामपति ने अपने पति का पूरा विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया और मुखाग्नि दी। इस भावुक दृश्य को देखकर गांव के सभी लोग भावुक हो गए, और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
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