बिन माँ की 12 साल की बच्ची के साथ पिता, दादा और चाचा की हैवानियत : दुष्कर्म का शिकार हुई बेटी की दिल दहला देने वाली दास्तां , गर्भवती होने पर जान से मारने की साजिश , आरोपी गिरफ्तार....

भिलाई की पत्रिका न्यूज़उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने न केवल मानवता को शर्मसार कर दिया, बल्कि रिश्तों की पवित्रता पर भी सवाल खड़े कर दिए। यहां एक 12 वर्षीय बच्ची ने अपने ही सगे रिश्तेदारों पर बार-बार हवस का शिकार बनाने का आरोप लगाया है। पीड़िता के अनुसार, उसके पिता, दादा और चाचा ने उसे पिछले एक साल से अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया। इस घिनौनी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि पीड़िता अब दो महीने की गर्भवती है। 

पीड़िता की आपबीती: घर ही बना नरक

पीड़िता अपनी मौसी के साथ थाने पहुंची और वहां अपनी आपबीती सुनाई। हालाँकि उसने बताया कि डेढ़ महीने पहले उसकी मां का निधन हो गया था, जिसके बाद से उसके लिए घर और भी एक कैदखाने में तब्दील हो गया। उसके अपने पिता और चाचा ने कमरे में अकेले पाकर उसे बार-बार अपनी हवस का शिकार बनाया, जबकि दादा ने खेत में ले जाकर दरिंदगी की। पीड़िता के अनुसार, इन सभी ने उसे जान से मारने की धमकी दी, जिससे वह चुप रहने पर मजबूर हो गई। 


परिवार की क्रूरता: मदद के बजाय मिली साजिश

जब पीड़िता ने अपनी दादी और चाची को अपने गर्भवती होने की बात बताई, तो उन्होंने न केवल उसकी बात को अनसुना कर दिया, बल्कि उसे दवा लेकर गर्भ गिराने की सलाह दी। जब यह बात आरोपियों तक पहुंची, तो उन्होंने लड़की को मारने की साजिश रचनी शुरू कर दी। डर और धमकियों के बीच भी पीड़िता ने साहस दिखाया और अपनी मौसी के पास पहुंची। मौसी ने उसका साथ दिया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

एक साल तक झेली दरिंदगी

पीड़िता, जो अब दो महीने की गर्भवती है, ने अपनी मौसी के साथ थाने पहुंचकर इस दर्दनाक दास्तां का खुलासा किया। उसने बताया कि उसके अपने ही पिता, दादा और चाचा ने पिछले एक साल तक उसकी अस्मिता को तार-तार किया। उसकी मां की मृत्यु के बाद, ये तीनों उसे लगातार अपनी हवस का शिकार बनाते रहे। खेत में, कमरे में या कहीं भी अकेला पाकर, उन्होंने दरिंदगी की हर हद को पार कर दिया। 

पुलिस ने की कार्रवाई

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया। अब उन्हें सख्ती से पूछताछ की जा रही है। पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए भेज दिया गया है ताकि इस मामले में पुख्ता सबूत जुटाए जा सकें। 

यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज की नैतिकता पर सवाल उठाती है। जहां बेटियां घर में सुरक्षित नहीं, वहां बाहर की दुनिया से क्या उम्मीद की जाए? इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हमारी बेटियों को सिर्फ बाहरी दुनिया से नहीं, बल्कि अपनों से भी खतरा है। 

 

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