भिलाई की पत्रिका न्यूज़ : दुर्ग और सुपेला में नशामुक्ति के लिए बनाए गए ओएसटी सेंटर (ओपिओइड सब्सटीट्यूशन थेरेपी) अब नशेड़ियों का नया ठिकाना बनते जा रहे हैं। इन केंद्रों से मिलने वाले ओएसटी पाउडर का इस्तेमाल नशे के लिए किया जा रहा है। दुर्ग पुलिस ने हाल ही में पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र के ऐसे ही एक सेंटर पर छापेमारी की, जहां से चार लोगों को इंजेक्शन से नशा करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
कैसे हो रहा है नशे का खेल?
मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग ओएसटी पाउडर को एविल इंजेक्शन के साथ मिलाकर उसका घोल तैयार करते हैं और उसे सिरिंज के जरिए शरीर में इंजेक्ट करते हैं। यह नशा युवाओं के बीच खतरनाक ट्रेंड के रूप में फैल रहा है। पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा के नेतृत्व में छापेमारी कर इसे उजागर किया।
गिरफ्तार किए गए लोग
छापेमारी में चार नशेड़ियों को गिरफ्तार किया गया:
1. सुनील डेकाडे (पद्मनाभपुर)
2. जागेश्वर साहू (कसारीडीह)
3. रवि चौहान (सिविल लाइन, दुर्ग)
4. सागर (सुभाष नगर)
पकड़े गए आरोपियों ने कबूल किया कि वे मेडिकल स्टोर से आसानी से एविल इंजेक्शन खरीद लेते हैं और ओएसटी सेंटर से अपने नाम या दोस्तों के नाम पर पाउडर इश्यू करवा लेते हैं।
ओएसटी पाउडर के दुरुपयोग पर सवाल
ओएसटी सेंटर का नियम है कि मरीज को पाउडर वहीं पर खिला दिया जाए और इसे बाहर ले जाने की अनुमति न हो। लेकिन, कर्मचारियों की लापरवाही और नशेड़ियों की चतुराई से यह पाउडर बाहर आ रहा है।
लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में बढ़ा नशेड़ियों का आतंक
भिलाई के लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल स्थित ओएसटी सेंटर का हाल भी चिंताजनक है। यहां नशेड़ी लड़के इस्तेमाल की गई और नई सिरिंज चुराकर अस्पताल के मरीजों और स्टाफ को परेशान कर रहे हैं। डॉक्टरों और नर्सों के साथ बदसलूकी के मामले भी सामने आए हैं। सेंटर को पावर हाउस में शिफ्ट करने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन यह अब तक नहीं हुआ।
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