भिलाई : श्रीसंत ज्ञानेश्वर महाराज की आकर्षक झांकी के साथ निकली भव्य शोभायात्रा...

भिलाई की पत्रिका न्यूज़ :भिलाई, श्रीसंत ज्ञानेश्वर महाराज माऊली संजीवन समाधि के 16वें पुण्यतिथि महोत्सव का तीन दिवसीय कार्यक्रम पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ प्रारंभ हुआ। आयोजन की शुरुआत आकर्षक झांकी और भव्य शोभायात्रा से हुई, जिसने सेक्टर-1 क्षेत्र का भ्रमण करते हुए आयोजन स्थल पर पहुँचकर समापन किया।  

इस कार्यक्रम का आयोजन श्रीगुरुवर सहजानंद महाराज सेवा समिति मंडली द्वारा विजय माहूरकर के निवास स्थान पर प्रतिवर्ष की तरह किया गया। पूजन कार्य सुबह 9 बजे विधिवत रूप से संपन्न हुआ, जिसमें अभिषेक और माल्यार्पण कर श्रद्धालुओं ने अपने भक्ति भाव व्यक्त किए।  

हरिपाठ और कीर्तन ने जगाई भक्ति की अलख

संध्या के समय पंचपदी भजन और हरिपाठ का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर देशभर से प्रसिद्ध कीर्तनकार जैसे तुकाराम महाराज निकुम, नत्थू महाराज कोर्डे, जयंत महाराज वरलीकर, गुणवंत महाराज हमदापुरे, और श्रीकांत महाराज उपगडे ने अपनी सुमधुर भजन-कीर्तन से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।  

श्रीसंत ज्ञानेश्वर महाराज के भक्ति कार्यों और उनके भजन-कीर्तन की महिमा का वर्णन करते हुए कीर्तनकारों ने उपस्थित जनसमूह को भक्ति मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।  

गोपाल काला प्रसाद का संदेश: एकता और समर्पण का प्रतीक

आयोजन के विशेष आकर्षण में से एक, गोपाल काला प्रसाद, अपनी अनूठी महत्ता के साथ सभी को प्रेरित करता है। इसमें पोहा, दही, शक्कर, नारियल, फल, और अन्य सामग्री को मिलाकर बनाया गया प्रसाद यह संदेश देता है कि समाज में सभी लोग—चाहे गरीब हों या अमीर—समान रूप से प्रेम और समर्पण के साथ जुड़े रहें।  

बाल गोपाल अजय माहूरकर द्वारा दही-हांडी फोड़ने की परंपरा को भी उल्लासपूर्वक निभाया गया। यह आयोजन श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की याद दिलाता है, जब वे अपने सखाओं के साथ मटकी फोड़कर माखन खाते थे।  

श्रद्धालुओं का सहयोग और समर्पण

इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं का बड़ा योगदान रहा। विजय माहूरकर, प्रशांत कुमार क्षीरसागर, राजेश माहूरकर, और अन्य भक्तजनों ने तन-मन-धन से सहयोग किया। महिलाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनमें लीलाबाई वानखेड़े, ज्योति मातुरकर, और उषा क्षीरसागर प्रमुख रहीं।  

भक्ति और एकता का अद्भुत संगम

श्रीसंत ज्ञानेश्वर महाराज का यह पुण्यतिथि महोत्सव भक्ति, प्रेम, और एकता का प्रतीक है। हर उम्र के श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर अपनी सहभागिता दर्ज कराते हुए भक्ति मार्ग को अपनाने का संकल्प लिया। इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि भक्ति का मार्ग सभी भेदभावों से परे होता है और समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है।

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