नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, अब राज्य में सभी क्लीनिकों को रजिस्ट्रेशन के लिए शपथ पत्र प्रस्तुत करने के बाद स्वतः लाइसेंस मिल जाएगा, जिसे ऑनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है। इसके लिए केवल 10 प्रतिशत संस्थाओं का निरीक्षण किया जाएगा और यदि कोई कमी पाई जाती है, तो उसे एक महीने के भीतर सुधारने के लिए कहा जाएगा।
नए नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया
- 1 से 10 बिस्तर तक के अस्पतालों: आवेदन के साथ शपथ पत्र देने पर तत्काल लाइसेंस जारी होगा। तीन महीने के अंदर सभी निर्धारित मापदंड पूरे करने होंगे।
- 11 से 30 बिस्तर तक के अस्पतालों: इन अस्पतालों को आवेदन के साथ रजिस्ट्रेशन करना होगा और तीन महीने के भीतर चिकित्सा अधिकारी द्वारा निरीक्षण कर लाइसेंस जारी किया जाएगा। अगर इस अवधि में निरीक्षण पूरा नहीं होता है, तो अस्पतालों को स्वचालित रूप से पंजीकृत माना जाएगा और ऑनलाइन लाइसेंस की प्रति डाउनलोड की जा सकेगी।
पुनः रजिस्ट्रेशन: पांच वर्षों के बाद संस्थाओं को फिर से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
इस संशोधन के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता और उनकी टीम ने राज्य सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कदम से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और चिकित्सा संस्थानों को इससे बहुत लाभ होगा।
इस पहल से चिकित्सा संस्थानों को मिलने वाली राहत से स्वास्थ्य व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद जताई जा रही है।

